Friday, December 17, 2021

चित्रा त्रिपाठी: बुलेट की बुलेटिन

श्वेता सिंह: Chip EXPERT

सुधीर चौधरी: TIHAR RETURN

अंजना ॐ मोदी,,,,,माफ़ करिये कश्यप

हर्षवर्धन त्रिपाठी:बच्चो की फीस का इंतेज़ाम तो करना ही है

सुशांत सिन्हा: मतलब कुछ भी

सुशांत सिन्हा  इस समय टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़े हुए है | 
उन्हें एक यूट्यूब चैनल भी चलाने का अनुभव है | 
वो दिखते है एक पत्रकार पर असलियत मै वो एक सत्ता पक्ष के प्रवक्ता है | 
वो सत्ता पक्ष के लिए मुखर है और वो उनके द्वारा की गयी अनैतिक कार्यो का भी बचाओ कर लेते है | 
बड़ी बेशर्मी से वो अपने पेशे को बदनाम करते दीखते है | 

किसान आंदोलन 

उन्हें किसान कानून बड़ा पसंद था , जब वो मोदीजी के द्वारा वापस ले लिया गया तब वो काफी आहात दिखे | 
उनके शो मै कई मेहमान आते है , जो कई पार्टी से जुड़े रहते है ,
पर जब वो विपक्षी मेहमान के साथ होते है , तो केवल एक काम की उसकी कितनी खिचाई करवा लो | 
राकेश टिकैत से उनका इंटरव्यू देखा, काफी तंज़ कसते दिखते है | 
ना जाने उनको क्या मिलता है , कोई पैसे की डील होती है , या कोई राज्यसभा ,लोकसभा या विधान सभा की सीट का अस्वासन मिलता है | 

रविश कुमार 

उनके कई वीडियो देखा गया है जहाँ वो रविश कुमार को खुल के भला बुरा कहते है | 
आज के पत्रकार दौर मै अगर कोई ५ पत्रकार जिन्दा है तो उसमे रविश कुमार ही है | 
अपने पेशे को इतना बदनाम करना , क्या सही है |

लखीमपुर कांड 

केन्द्रिय गृह राज्य मंत्री का बेटा , जो किसानों पे गाडी चढ़ा दिया था, 

जब वो जमानत पे बाहर आया तो वो खुल के उसका पक्ष लेते दिखे | 
जबकि सबको पता की वो घिनौनी घटना का मुख्य अभियुक्त ही वो है ,पर सुशांत को कोई चिंता नहीं| 

२०२२ उत्तर प्रदेश चुनाव 

2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव मै वो खुल के सपा के नेताओ को बदनाम करने मै लगे रहे | 
चुनाव के दौरान वो कई रैली मै और वहां भाजपा समर्थको से बातचीत का वीडियो चला दिया | 
सहारनपुर मै तो वो मुसलमानो को ही भाजपा समर्थक बना दिया | 

अरविन्द केजरीवाल

अरविन्द केजरीवाल को तो वो जैसे अपना बचपन का दुस्मन मानते है | 
उनके हर बयान का गलत तरीके से विश्लेषण करना | क्लासरूम बना या नहीं बना | 
क्यों २०००० क्लासरूम बना और २२००० नहीं, ये सब उन्होंने वीडियो मै बना के अपलोड कर दिया | 

अमन चोपड़ा: भाई है अपना

प्रदीप सिंह: पत्रकारिता के शहंशाह

पत्रकारों का ज़ुल्म