Monday, November 28, 2022

GITA 9-26

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति |

तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन: || 26||


जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ॥26॥

GITA 9-34

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।

मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥९-३४॥

मन्मना भव मदभक्तों मधाजी मां नमस्कुरु | 
मामे वैष्यसि वुक्त्वैवम आत्मनः मत्परायण || 

मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा॥34॥

मन्मना भव मदभक्तों मधाजी मां नमस्कुरु | 
मामे वैष्यसि वुक्त्वैवम आत्मनः मत्परायण || 

Sunday, November 20, 2022

GITA 9/22

अनन्याश्र्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् || २२ ||


अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते | 
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम || 


किन्तु जो लोग अनन्यभाव से मेरे दिव्यस्वरूप का ध्यान करते हुए निरन्तर मेरी पूजा करते हैं, उनकी जो आवश्यकताएँ होती हैं, उन्हें मैं पूरा करता हूँ और जो कुछ उनके पास है, उसकी रक्षा करता हूँ |



GITA 2-23

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: |

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत: || 23||

इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।।


Sunday, October 2, 2022

सत्संग की जरूरत

पुनरपि जननं पुनरपि मरणं,
पुनरपि जननी जठरे शयनम्।
इह संसारे बहुदुस्तारे,
कृपयाऽपारे पाहि मुरारे॥21॥


संत का मत है की मनुष्य ,भगवान् ब्रह्म की अनुपम कृति, वह इस शरीर रूप मै रह के अध्यात्म के उच्तम स्तर तक पहुंच सकता है | 
जब साधारण मनुष्य का अंत होता है तो वो अपने कर्म अनुसार उसकी आत्मा की नीचे की योनियों मैं प्रवेश मिलता है | उसको पशु,पक्षी, सर्प आदि आदि योनि मैं चला जाता है | 
नीचे की योनियों मैं कष्ट और पीड़ा सेहके उसे पुनः मनुष्य की योनि प्राप्त होती है | मनुष्य शरीर मैं अगर पुनः वो अध्यात्म का अवसर चूक जाता है ,तो उसको पुनः मनुष्य योनि मैं प्रवेश करने मैं बड़ी दिक्कत होती है | 
मनुष्य को सहस्त्र वर्ष लग जाते है मनुष्य योनि मैं लौटते | 


इसीलिए कहाँ गया है की सबसे अच्छा तरीका है इस जन्म -मृत्यु के क्रम से ही वो निकल जाए | उसके लिए सत्संग अपनाने को कहा गया है | अच्छा सत्संग अपनानें मैं उसको एक अच्छे संत या गुरु की जरूरत पड़ती है| आचार्य शंकर ने कहाँ की भगवन बार बार जनम लेके,बार बार मरके ,और बार बार माँ के गर्भ मै आके ,वो बहुत परेशान हो गए है,यह संसार बहुत दुःख दायी है ,हे गोविन्द, कृप्या मुझे इस चक्र से छुटकारा दिलवा दो | मेरी जवान रूपी नाव को ,हे दीनानाथ पार लगा दो | 

संतो का मत है की आत्मा परमात्मा का ही अंश है,
इस मायारुपी दुनिया मै फस जाने के कारण ,इस शरीर पर उस माया का स्थूल या सूक्ष्म आवरण आ जाता है | इस पर्दा आ जाने के कारण, वो इस संसार मैं बहुत परेशान रहता है | 
या पर्दा उसको माया रूपी दुनिया से अलग नहीं होने देता है | इस क्रम मैं वो अपनी असीम शक्ति को खो बैठता है | अतः वो जिस कारण इस मनुष्य शरीर को प्राप्त हुआ, वो लक्ष्य अर्जित नहीं होता है | 

इस परिस्थिति से केवल एक सच्चा गुरु ही आपको निकल सकता है | वो  माया रूपी आवरण को आपके ऊपर से हटा देता है | जो सकती आपके माया रूपी पर्दा मैं दबी हुई है, गुरु उस शक्ति को पुनः जागृत कर देता है | वो आत्मा को परमात्मा के मार्ग तक जाने का रास्ता भी बताता है और अंत मैं आपको परमात्मा से मिला देता है | आप जैसे ही परमात्मा से मिल जाते है, वैसे ही आपको अनन्तः शांति की अनुभूति होती है | 

सद्गुरु की खोज

अगर आपके अंतर मन मै भगवान प्राप्ति का बीज अंकुरित हो गया हैं | 
तो ये भगवान की एक बहुत बड़ी कृपा मानिये | 
भगवान की बहुत बड़ी कृपा होती है तभी आपके अंदर उसको प्राप्त करने की जिज्ञासा बढ़ती है | ये कोई मात्र संयोग नहीं होता है | 
भगवान् प्राप्ति के अनेको उपाय हमारे हिन्दू धर्म की पुस्तकों मै है परन्तु गुरु शिष्य परंपरा का एक अलग ही स्थान है जिसकी गति बाकी सारे उपायों मै सबसे तेज़ बतलायी गयी है | 


गुरु एक पुल की सड़क की तरह होता है जिसका एक छोर मायावी दुनिया मै होता हैं और दूसरा छोर भगवान् से मिलवा देता है | 
मायवी दुनिया मै आप परेशान रहते है | वहां एक अन्धकार होता है | आप उस अन्धकार से प्रकाश की और जाना चाहते है | उसी प्रकाश तक ले जाने मै गुरु आपकी सहायता करता है | 

आपके अंदर अगर गुरु की खोज की लालसा हैं तो इससे आप साधारण प्रक्रिया न समझिये | 
भगवान् ने आपको लाखों लोगों मै से आपको चुना है | 

एक बार आप गुरु के सानिध्य मै आ गए फिर आपको कुछ करने की जरूरत नहीं होती है | आपकी बाकी सारी चिंता गुरु की चिंता हो जाती है | 

अब वो आपका पिता हो जाता है और आपका ख्याल हर क्षण रखता है | 


आप एक सच्चे गुरु से कैसे मिले उसके कुछ संकेत है जो हमारे सत्संग के महापुरषों ने हमें बतलाया है | 

  • जब आपका साक्षात्कार एक सच्चे संत से होता हैं ,तो आप शांति की अनुभूति करते हो | आपको एक अनायास ही आनंद प्राप्त होता हैं | उस व्यक्तित्व के लिए एक आकर्षण होता हैं | 
  • एक सच्चे संत के सानिध्य मै आके आपके मन मै शान्ति और धैर्य जैसे गुण आने लगते हैं | धीरे धीरे सांसारिक वस्तुए जो आपको पहले मोहित करती थी, उनसे आपका दिल लगना काम होने लगता है | आप अपने घर का काम भी करते रहोगे और उसमे कोई विशेष आनंद भी नहीं आएगा | 
  • समय समय पर सच्चे संत आपकी आध्यात्मिक उत्थान हेतु जरूरी सहायता प्रदान करते रहते है | साथ ही मानसिक सत्संग द्वारा निरंतर मार्गदर्शन देते रहते है |  ये एक अनुभव करने योग्य चीज़ है जिसके लिखित मै समझा पाना अंसम्भव है | 
  • आप देखेंगे की सच्चे संत का व्यवहार सबके साथ, चाहे वो उनका पारिवारिक सदस्य हो, या उनका साधक हो,सबके साथ नम्र और विनीत होगा 
  • एक सच्चा संत आपको हमेसा यही परामर्श और शिक्षा देता है की आपको एक सादा और शुद्ध जीवन व्यतीत करना चाहिए | आपको साथ ही ये भी वो शिक्षा देगा की मादक वस्तुओं से दुरी बनाये रखो | 
  • एक सच्चा संत आपको परमात्मा के प्रेम की ऊपर बढ़ने के आतंरिक मार्ग की शिक्षा देता है | 
  • एक सच्चे संत को आपके धन अथवा किसी प्रकार  से लेना देना नहीं होता | इनकी दैनिक दिनचर्चा की पूर्ति प्रकृति द्वारा स्वतः ही हो जाती है | 
  • एक सच्चा संत आपको सांसारिक द्वयत्व एवं अपने माता,पिता ,परिवार ,समाज एवं`संसार की अवहेलना करने को कभी नहीं कहेगा | वो आपको संसार से अलगाव या सन्यास के लिए कभी भी प्रोत्साहित नहीं करेगा |

Friday, September 30, 2022

ध्यान की क्रिया

ये मेरा अनुभव है,और मेरा अल्प -ज्ञान भी हैं ,
इस संसार मै भगवान् की प्राप्ति का केवल एक रास्ता है और वो है ध्यान | 
तमाम तरह का कर्म काण्ड वैगेरह अंकित है , परन्तु मेरे हिसाब से वो सब आपको ध्यान रूपी क्रिया तक ही ले जाता है| 

जैसे ये मेरा मानना है,जो की पूरी उम्मीद है की गलत भी हो सकता है की आप मान लीजिये जाप करते है | ये एक क्रिया है जिसका बहुत महत्व है,परन्तु जब आप इस क्रिया को पुरे मनोयोग से करते है तो कुछ दिन,महीना ,वर्ष या वर्षो बाद आप अपने आराध्य का ध्यान करने लगते हो| आप उसी के स्मरण मै ही रहने लगते हो | आप उठते ,बैठते,खाते ,पीते, केवल उसी भगवान् के चित्र अपने मन मै संजोये रहते हो | और हम इसी को ध्यान कहते है | 

खैर मैं यहाँ जिस ध्यान के बारे मै लिख रहा हूँ वो एक क्रिया है जो आप दिनभर नहीं, परन्तु कुछ मिनट या घंटो के लिए करते हो | ये क्रिया दुनिया मै बहुत तेज़ी से मशहूर हो रही है और लोगो को इससे लाभ भी मिल रहा है | 

यह ध्यान की क्रिया महात्मा राम चंद्र जी महाराज ने अपने गुरु हुज़ूर साहब से लेके हम  सबको दी | 


ध्यान की क्रिया मन द्वारा होती हैं | हमे अपने मन को संयम मै लाना होता है,उसमे उठ रहे विचारों को अपने द्वारा नियंत्रण करना होता है | या यु कहाँ जाए की जो विचार हमारे मन मै आ रहे है,उनको नहीं आने देना होता है | मन का ही खेल है इस क्रिया मै | आप इस  क्रिया मै सफल होते हो या असफल,सब मन पर ही निर्भर होता है | 

इस क्रिया मै हमको एक स्थिर आसान पे बैठना होता है | जिससे हम आराम से ध्यान के दौरान बैठे रह सकते | इसमें आप पलथी से बैठ सकते है, या आप कुर्सी पर भी बैठ कर रह सकते है | 
आँखें बंद कर लीजिये | 
हमने अगर गुरु लिया है ,तो ठीक नहीं तो,जिससे भी आराध्य समझते है ,उसको अपने सामने बैठा हुआ महसूस करना होता है | 
उसके बाद हमको ये मन की आँखों से देखना होता है की जो आराध्य हमारे सामने बैठे है,उनमे से प्रकाश निकल रहा है और सारा प्रकाश हमारे शरीर मै जा रहा है, और हमारे शरीर का रोम रोम उस प्रकाश से प्रकाशित हो रहा है | 

जब हम थोड़ी देर ऐसा कर ले जाते है और उस समय मन मै बाकी विचार नहीं आ रहे होते है ,
तब मन अपने स्थाई भाव मैं चला जाता है| हमारा मन शांत और निर्मलता की और चला जाता है | इस अवस्था को हम समाधी लेना कहते है और आप एक बार इस स्थिति पे पहुंच गए फिर आप जितनी देर ध्यान करना चाहे , कर सकते है | 

यह सुने मै काफी सरल है,परन्तु इसको कितने लोग कर रहे है, आप अपने आस पास देख ही सकते है | 
मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है की इस क्रिया से हम ईश्वर से साक्षात्कार कर सकते है | 

शब्द मार्ग

ये उन साधकों के लिए है जो नए नए ध्यान मार्ग मै आना चाहते है | 
उनको क्या करना चाहिए की पालथी की अवस्था मै बैठ जाए और अपनी आँख बंद कर लें | 
अपने दिल की दड़कन को महसूस करें | उस धड़कन की आवाज़ को सुने | उससे निकल रहा ॐ ,राम या अल्लाह की आवाज़ को सुनने के लिए खुद को प्रेरित करें | 
इस क्रिया को शब्द मार्ग का नाम दिया गया है | 
इस क्रिया करने से भी मन काफी शांत होता है | 

विशवास

देखिये इस ध्यान रूपी अभ्यास को सरल बनाने के कई तरीके है को भी आसान भी है और बहुतो के लिए ये बहुत कठिन है |
 आप के द्वारा ये अभ्यास बहुत सरल हो जाएगा अगर आप विश्ववास रखिये की इस क्रिया द्वारा आप ब्रह्मज्ञान को प्राप्त कर लेंगे | आप को अगर विश्वास है की इस क्रिया के बाद आप ईस्वर को प्राप्त कर लेंगे, तो ये क्रिया बहुत आसान है | 

दूसरा विश्वास करना है  जब आप ध्यान लगा रहे है तो ईश्वर आपके सामने बैठा है | आपके आराध्य द्वारा निकल रहा प्रकाश आपको सराबोर कर रहा है | इस चीज़ पर अगर आपको विश्वास है तो सच मानिये इस क्रिया मै आप बहुत जल्द पारंगत हो जाएंगे और इस ध्यान रूपी अभ्यास की यात्रा मैं आने वाली कठनाईयाँ भी स्वतः हल होते चली जाएंगी | 

आप जैसे जैसे ध्यान करते रहेंगे, आप इसमें और लिप्त होते जाएंगे | कई साधकों मै देखा गया है की वो ध्यान करते करते समाधी मै चले जाते है अर्थात आपके मन मै विचार आना ही बंद हो जाता और ऐसा भी देखा गया है की कुछ साधक इसका इतना अभ्यास कर लेते की उनको कोई अतिरिक्त बल नहीं लगाना पड़ता मन के विचारो से पार पाने के लिए | मतलब ध्यान के दौरान विचार आया और वो स्वतः ही चला गया | सोचिये ऐसे साधको की स्थिति | 

ध्यान का समय

परम पूज्य राम चंद्र जी महाराज ने कहा है ध्यान के लिए सुबह 4 से 6 बजे और शंध्या का 6 से 8 का समय उपयुक्त है | यानी दिन-रात मिलन से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक का समय उपयुक्त है | 

वैसे आपको जो समय ठीक लगे आप शुरुआत मै उसको अपना सकते है | 
कई संतो ने कहा है की संध्या का समय ध्यान योग मै सबसे उपयुक्त है | 
कई संतो का मत है रात्रि के तीसरे पहर यानी रात एक बजे के बाद का समय सबसे उपयुक्त है | 

परन्तु नए साधक अपने हिसाब से समय का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र है | 

हमारे सत्संग के एक पहुंचे हुए संत ने फ़रमाया है की रात्रि विश्राम करने के लिए नहीं होती है |
ये समय ईश्वर की याद करने के लिए होता है | उस समय गुरुदेव शिष्यों मैं ध्यान शक्ति पहुंचते है | 
उनका कहना था की जो भी  अपने आराधय का ध्यान किये बिना हो सो जाता है , उसके पास से आराध्य की ध्यान धारा आकर लौट जाती है | वो साधक रात्रि कृपा से विमुख हो जाता है | 

जो साधक अपने आराध्य का ध्यान करते करते सोता है , उसको आराध्य ऊंची स्थिति मै ले जाते है | 
ध्यान मै सोने की पहचान है की शरीर हल्का लगता है | 


नए साधक ध्यान शुरू करें और धीरे धीरे इसका समय बढ़ाते जाए | 
आप अपनी व्यस्तता के हिसाब से ध्यान का समय निर्धारित कर सकते है | 

महात्मा राम चंद्र महाराज जी की शिक्षा

महात्मा राम चंद्र महाराज जी की शिक्षा





आप कभी भी अपनी शक्ल का ध्यान करने को नहीं कहा | कहा की जो तुम्हे सबसे ज्यादा अच्छा लगे , उसका ध्यान करो | 

आप कई भक्तो को कर्म-काण्ड करने के लिए भी कह दिया करते थे | किसी भक्त को जप करने का भी आदेश दे दिया करते थे | 

महात्मा जी की शिक्षा एक मिली जुली शिक्षा थी | 
जिसमे कर्म-काण्ड, कर्मयोग ,भक्तियोग ,ज्ञानयोग और प्रेमयोग सब कुछ शामिल था | 

आपकी शिक्षा हर एक भक्त के अनुसार थी | इसमें कोई एक विधि नहीं थी | जिस पात्र का भक्त था,उसके लिए वैसे ही शिक्षा | 

आपके के अनुसार फकीरी की तीन निशानी होती है इल्लत,क़िल्लत और ज़िल्लत।
इल्लत का अर्थ है की शारीरिक कोई व्याधि होनी चाहिए | 
क़िल्लत का अर्थ है की रुपए की तंगी रहना 
और ज़िल्लत का अर्थ है की लोग उसकी निंदा भी लगातार करते रहे 

इन तीन चीज़ होने से अहंकार नहीं रहता और घमंड थोड़ा दूर रहता है | 
आप  कहते थे की जिसने अपना मन मार लिए, वो इस दुनिया का बादशाह है | 
साथ ही मन मारना दुनिया का सबसे कठिन कार्य है | 

सदाचार से रहने के आप बहुत बड़े पक्षधर थे | 
प्रार्थना मै आपका बहुत विश्वास था परन्तु वो प्रार्थना अपने सुख सुविधा के लिए नहीं होनी चाहिए | प्रार्थना हमेसा दूसरे के लिए होनी चाहिए |

Thursday, September 29, 2022

महात्मा रामचंद्र जी महाराज

महात्मा रामचंद्र जी महाराज 

महात्मा रामचंद्र जी महाराज का जन्म २ फ़रवरी १८७३(1873 ) को हुआ था.

उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ मै हुआ था.
आप की माता जी ने आपके अंदर अध्यात्म का बीज़ बोया।
आप बचपन मै ही भगवान् को पाने का साधन ढूढ़ने लगे | 

आप की रूचि संगीत की तरफ भी थी और आप एक सुरीली आवाज़ के धनि थे 
आपके पिता जी जमींदार थे 
जब आप सात वर्ष के थे , तब आपकी माता जी न निधन हो गया | 

आपने अपने अधाय्तम जीवन मैं अपनी अर्द्धनदिनी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना | आप जो सत्य मार्ग पे चले उसका पूरा श्रेय अपनी आराध्य धर्म पत्नी को दिया | 

होश सँभालने पर आप स्वामी ब्रह्मानंद जी के पास जाय करते थे और उनके उपदेश सुना करते थे | 
स्वामी ब्रह्मानंद जी महराज की उम्र उस समय १५० वर्ष थी | 

मकान छोटा होने के कारण आपने अपना नया घर स्वामी के पास ही लेलिए था | वो घर एक मस्जिद के पास था | 
आपकी कोठरी के बगल मै एक सिद्ध मौलवी संत रहा करते थे | 

एक दिन दफ्तर से काम ख़तम करने मैं आपको  समय लग गया और रात काफी हो गयी | लौटते वक़्त तेज़ बारिश होने लगी और सर्दी के दिन चल रहे थे | आपको बहुत ठण्ड लग रही थी| आप जैसे ही अपने कोठरी का दरवाजा खोले तो बगल मैं रहने वाले मौलवी संत ने बोलै की बेटा बहुत देर हो गयी आने मैं | 
मौलवी संत के इस मैं एक जादू सा था | वो प्रेम आपने महसूस किया| वो आकर्षण आपका दिल दिमाग हिला दिया | 
मौलवी संत ने बोला जाओ कपडे बदल लो और आओ आग जलाया हूँ | आके थोड़ा हाथ पैर सेक लो | 
आपने अपना आदाब पेश किया और जैसा उन्होंने बोलै वैसे ही किया | 

आप कपडे बदल के मौलवी संत के कमरे मैं दाखिल हुए और आदाब पेश किया | 
मौलवी संत से आपकी आँखे मिली तो सिर से लेकर नख तक एक बिजली दौड़ गयी | आपको ऐसा लगा की मानो दो आत्माएं मिल के एक हो गयी है | मौलवी साहब ने कृपा पूर्वक आपको अपने बिस्तर पे लिटा दिया और रजाई ओड़ा दी | 

आपको एक अज़ीब आनंद की प्राप्ति हो रही थी | पूरा माहोल मस्ती सा लग रहा था | आप खुद को एकदम हल्का महसूस कर रहे थे | पुरे शरीर मै एक प्रकाश सा लग रहा था | 

वर्षा बंद होने के बाद आपने आज्ञा ली और अपने कमरे  चल पड़े | हर तरफ प्रकाश ही प्रकाश दिख रहा था | पुरे शरीर से ॐ की ध्वनि निकल रही थी | 
कमरे पर पहुंच कर आपने खाना भी नहीं खाया और सो गए | रात मै स्वपन मै आपको कई संत महात्माओं के दर्शन हुए और उन सबसे मै आप भी थे |आपने आगे स्वपन मै देखा की एक दिव्या सिंघासन ऊपर से उतर रहा है और वो नीचे आया | उस सिंघासन पर एक दिव्य पुरुष विराजमान है | सब महापुरुष और संत आदर मै खड़े हो गए | मौलवी संत ने आपको उनकी सेवा मैं लगा दिया | उन महापुरुष ने कहा की इस बच्चे का झुकाओ तो शुरू से ही परमात्मा की तरफ  है | 

सुबह आपने ये स्वपन मौलवी संत को सुनाया | संत ने सुनते ही आँखे बंद कर ली और धयान मग्न हो गए |फिर आँखें खोल कर बोलै की ये स्वपन नहीं सत्य हैं | तुम धन्य हो और तुम्हारी जैसी आत्मा बार बार नहीं आती है | मै तुम्हे बहुत दिन से छुप छुप कर देखता था और मुझे भी ऐसा लग रहा था | तुम्हारी हस्ती जनम से ही परमात्मा की तरफ झुकी हुई है और तुम इस संसार मै दीन-दुखी की सेवा करने आये हो | उनको अन्धकार से प्रकाश की तरफ से चलने आये हो | धन्य हो तुम | 

आप मौलवी संत को हमेसा हुज़ूर साहब बोलते थे | 
उसके बाद से आप लगातार हुज़ूर साहब से मिलते रहते थे और उनसे लाभान्वित होते रहते थे| 
 23 january 1986 को हुज़ूर साहब ने आपको अपने शिष्य के रूप मै स्वीकार कर लिया और अपनी सोहबत से लाभान्वित करने लगे | 
 हुज़ूर साहब ने 11 october 1986 को आपको आचार्य की पदवी से सुशोभित कर दिया| 
हुज़ूर साहब ने आपको आदेश दिया ये विद्या का प्रचार प्रसार करना ही तुम्हारा काम है |इसके लिए जितनी तेज़ी से लग्न हो लग जाओ और यथाशक्ति पूर्ण करो | 

आपने अपने गुरु महाराज की वाणी का अक्षरश पालन किया और अपने शरीर मै रहते हुए केवल इस मिशन मै लगे रहे | 

आपने अपना एक प्रसंग साझा किया था | एक बार हुज़ूर और आप टहलने के लिए निकले थे |आप अपने घर परिवार की समस्या हुज़ूर साहब को  बता रहे थे| आप दोनों एक पुलिया पे बैठे | अचानक हुज़ूर साहब भक्ति और प्रेम के आवेश मै आके अपना सीधा हाथ महाराज के कंधे पे रख दिया | हुज़ूर साहब बोले की भाई बहुत भाग्यशाली हो | परम पिता के प्यारे हो | तुमने बहुत सस्ते मै ये अमूल्य नियामत प्राप्त कर ली | 
इस कृपा और विद्या का कोई मोल नहीं है | 
आपने उस समय का विवरण दिया की हर और प्रकाश ही प्रकाश था | एक अजीब आनंद था हर तरफ | एक आकर्षण था | हर चीज़ जो नज़र मे आ रही थी चाहे वो कोई घर हो, दीवाल हो,सब उस आनंद मैं सराबोर थे | सब उस प्रकाश मैं नाच रहे थे | अजीब मस्ती सब पर छाई हुई थी | ऐसा मालूम होता था की यही प्रकाश सब का जान ,जीवन और लक्ष्य है| 
इस दृश्य के बाद हुज़ूर साहब ने बोलै की यही अब तुम्हारा लक्ष्य है | अब तम्हे इसी मैं लय हो जाना चाहिए |मै अब तुम्हारे पीछे रहूँगा और तुम आगे-आगे चलोगे | 
आपने इस दिन और समय का विवरण किया की जाते वक़्त तो दुनिया मेरे साथ थी ,चिंताएं मेरे साथ थी ,
परन्तु वापस लौटते समय दुनिया पीछे छूट चुकी थी | सारी चिंताए ख़तम हो चुकी थी | चिंताओं की जगह ईश्वर प्रेम ने ली थी | 

आचार्य पदवी देते समय हुज़ूर साहब ने एक जलसा रखा | उस कार्यक्रम मैं सारे धर्म को मानाने वाले संत महात्मा आये | हुज़ूर साहब ने फ़रमाया की मैंने अपने जवान मैं इस बालक को तैयार किया है | आप सभी  इसकी जांच परख कर लीजिये और कोई सुझाव हो तो वो भी साझा करिये | 
हुज़ूर साहब ने सारे संत महात्मा को ध्यान मै बैठा दिया | हुज़ूर साहब ने महराज जी से बोला बेटा पुत्तूलाल,इन सब साहबान पे तवाज़ो फरमाओ और जिसके जो भी सवाल हो, उसका हल करो | अल्लाह तुम्हे कामयाबी दें | 

आपने तवज़्ज़ो देना प्रारम्भ किया|पहले तो सब आनंद महसूस करने लगे | फिर धीरे धीरे सब विचार शून्य होने लगे | फिर अंत मैं शिवाय परमात्मा की याद के अलावा कोई भी ख्याल किसी के दिमाग मै न रहा | न कोई जमीन थी, न कोई आसमान था | बस एक नूर था जो सबकी जान था | उस नूर मैं एक अजीब आकर्षण और प्रेम था | उसमे सब मस्त थे | उस प्रकाश मैं जी चाहता था की शरीर टूट कर आत्मा उस प्रकाश मै समां जाए | आंखों मै आसूं जारी थे | हुज़ूर साहब ने आदेश किया की ध्यान भंग किया जाए |सबने एक सुर से बोला की कमाल हासिल किया है और सत-पद तक रसाई ही नहीं उसमें पूर्ण लय अवस्था भी प्राप्त कर ली है ।


आप सभी धर्मो को मानाने वाले थे| आपके गुरु इस्लाम धर्म के थे | आपने सदा अपने गुरु के आदेश का पालन किया और सारे भक्तों को अपना ज्ञान देते रहे | 

आपका मत था की जिस धर्म मै जन्म लिया है, सारे कर्म काण्ड उसी धर्म के अनुसार करते रहना चाहिए | 
हालांकि आपके गुरुदेव इस्लाम धर्म के मानाने वाले थे परन्तु आपने हमेशा हिन्दू धर्म का पालन किया | 
आपने न कभी रोज़े रखे न कभी नमाज़ अदा की | 

आप चित्र या मूर्ति पूजा के विरोधी रहे है | परन्तु कोई जिज्ञासु या भक्त आपकी तस्वीर अपने कमरे मैं रखे तो आपको कोई दिक्कत नहीं थी | आप चरण स्पर्श के भी विरोधी थे परन्तु हिन्दू मान्यता मै अपने पूज्य का चरण स्पर्श करके प्रणाम करना इतना घुल गया था की आपने इसका भी विरोध नहीं किया और कोई भक्त आपके चरण छूना चाहता था तो आपको कोई विशेष विरोध नहीं था | 


आप का आध्यात्मिक व्यक्तियों के लिए बहुत आदर था |  आप जिस जिस भी संत को जानते,समझते जो आपसे पूर्व मै हुए , उनके लिए, आपके मन मै बहुत आदर था| आप कहा करते थे की हमारी वंस की म्हणता हमारे पूर्व संतो और महा पुरषो के कारण है | 

सिद्धि ,शक्ति,तंत्र मंत्र के भी आप ज्ञाता थे, परन्तु आपने इसका विरोध ही किया और कभी भी इसका प्रचार प्रसार का किया न किसी को प्रेरित किया | कोई आपको मज़बूर करता था तो आप ताबीज़ लिख दिया करते थे | 

आपको प्रार्थना पे बहुत भरोसा था पर वो कभी अपने लिए प्रार्थना नहीं करते थे और न की कभी सांसारिक लाभ  के लिए प्रार्थना करते थे| 
प्रार्थना वो थी जो दूसरे के लिए की जाए | 

गुरु शिष्य रूपी पवित्र परंपरा के वो पक्षधर थे और कहते थे की हर मनुष्य को गुरु  चाहिये परन्तु गुरु बहुत देख भाल के रखने की सलाह दिया करते थे | 

आपके गुरु महाराज आपसे बहुत खुश रहते थे और अपना सब कुछ आपको दे दिया था | आशीर्वाद रूप मै उन्होंने कहा था  आपकी सात पुष्ट इस सत्संग रूपी क्रिया को सींचेगी और देखने मै आता है की ४ पुष्ट तो देखि जा रही है जो ये सत्संग चला रही है | 

देखने मै आया की आपसे कुछ मुसलमानों ने कहा की ये विद्या आपने एक मुसलमान सूफी संत हुज़ूर साहब से ली है तो अब आप भी मुसलमान बन जाइये | ये बात आपने हुज़ूर साहब से बोला की सरकार आपका आदेश हो तो कहिये मै धर्म परिवर्तन करवा लूँ | ये बात सुनते ही हुज़ूर साहब बहुत गुस्सा हुए और उस मुसलमान मुखिया को अपने बाड़े से अलग कर दिया | 

हुज़ूर साहब कहा करते थे की संत का कोई धर्म नहीं होता |वो सबका होता है | संत तो खुदा की जाति को ही अपनी जात बना लेता है| 


एक प्रसंग आता है आपके जीवन का की आपके सहयोगी ने ब्रह्मानंद आश्रम के निकट पिकनिक का प्लान बनाया और आपको भी जबरदस्ती लेकर चले गए| पहले नाच गाना हुआ और फिर सबसे भांग कुटी और पि| आपने मना किया की आपने हुज़ूर साहब से प्रतिज्ञा ली है की आप नशा से दूर रहेंगे | परन्तु आपके दोस्तों ने आपको पकड़ के जबरदस्ती भांग पीला दी | पिने के बाद आपका चेहरा तमतमा गया और आपका चेहरा प्रकाश मैं बदल गया | आपका चेहरा का नौ नक्श बदलने लगे और दाढ़ी मुछे आने लगी | सब साथी डर गए और खड़े हो गए | इतनी देर मै स्वामी ब्रह्मानंद भी आ गए और सब सहयोगिओं को फटकारा | 
लौटते समय रस्ते मै हुज़ूर साहब भी मिल गए | सहयोगियों ने पहचाना की आपका चेहरा एकदम हुज़ूर साहब की तरह बदल गया था | 
आप हुज़ूर साहब के साथ टहलने निकल गए और सारा वृतांत आपने उनको सुनाया | हुज़ूर साहब ने बोला की जो लोग परमात्मा पर भरोसा करते है , परमात्मा उनका साथ देने आते ही रहते है | 



14 अगस्त सर 1931 ई॰ की सुबह को पूजा वाले कमरे में जहाँ हमेशा संध्या हुआ करती थी, बिना किसी की सहायता के स्वयं पधारे । खाट पर लेट गये और आँखें बन्द कर ली और फिर नहीं खोली और न किसी से बातचीत की । मक्खी वग़ैरा को हाथ से उड़ा देते थे और बस रात के एक बजे ईश्वर की उस अखण्ड ज्योति ने पार्थिव शरीर को छोड़ दिया और अपने असल भण्डार में सदा के लिये विलीन हो गई ।


          हम ना मरे, मरा संसार ।
          हमको मिला जिलावनहार ।।


Tuesday, September 27, 2022

राहुल गाँधी से सीखिए मुश्किल हालत मैं कैसे खुद को संभाले

भारतीय राजनीति का कलंक


RPN सिंह 
अश्विनी कुमार 
कैप्टेन अमरिंदर सिंह 
सुनील जाखड़ 
हेमंत बिस्वा शर्मा 
ग़ुलाम नबी आज़ाद 
अशोक गेहलोत 
ज्योतिरादित्य सिंधिआ 

अशोक गेहलोत:कलंकित चेहरा

अशोक गेहलोत

जब अपने आप को भूल के , सब कुछ छोड़ चाड के कांग्रेस को पुनर्जीवित करने पे लग जाना चाहिए था
ये ऊपर वाले नाम ने अपना क़र्ज़ चुकाना जरूरी नहीं समझा 

कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है
वो जो-जो दांव लगाती है, वो सब गलत चले जाते है 
कई बार वो दांव उल्टा भी साबित होता है 
कांग्रेस आज की तिथि मै केवल २ राज्य मै मौजूद है


जब मै कांग्रेस को देखता हूँ तो लगता है की कांग्रेस की चिंता केवल इस समय उसके निष्ठावान मतदाता को है या गाँधी परिवार के सदस्यों को है 
बाकी तो मुझे कोई दिखता ही नहीं है 

ऐसी दयनीय स्थिति बहुत दुःख देती है 
सारे पुराने कांग्रेसी मलाई तो खा लिए जब कांग्रेस का डंका बजता था 
आज जरूरत थी की आप अपनी माँ रूपी पार्टी का दूध का क़र्ज़ चूका देते 

लेकिन ये सब नेता ने ऐसा दानव रूपी चेहरा दिखाया की लगता ही नहीं ये सब भारतीय ही नहीं है 
आप को जो करना था वो बहुत ही सामान्य समझ का आदमी भी जान सकता था 


ये जो आज हो रहा है ये देश के साथ क्रूरता है 
सबसे बड़ी धोखा धड़ी है 
देश की विपक्षी एकता  क्रूरता है 
शर्म आनी चाहिए अशोक गेहलोत को 


जिस जिस को भी उम्मीद रहती है की देश मै शायद लोकतंत्र बच जाए ,शायद ये एक उम्मीद की किरण है 
तब तब 
कोई न कोई 
कांग्रेसी नेता आता है और कांग्रेस द्वारा अर्जित यश का छीछा लेदर करके चला जाता है 
शर्म आनी चाहिए इन सारे वयो वृद्धा कांग्रेसी को 

नमक हराम का मतलब चाहे कुछ भी होता हो 
परन्तु अगर कोई इंसान नमक हराम है तो ये कांग्रेसी है 

ये भाजपा के बिना वेतन दिए दलाल है जो देश को आज की स्थिति मै भाजपा के साथ पंहुचा दिए है 


कितने महीने का संघर्ष रहेगा ये राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा, 
कितने स्वंसेवक रात दिन लगे रहते है की ये यात्रा चलती रहे, 
कितनी लोगों की दुआएँ लगी रहती होंगी की ये यात्रा सफल हो जाए,
राहुल गाँधी और कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता जिनको कुछ न मिला ,  वो सब राहुल गाँधी के साथ है 
ये यात्रा केवल कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए नहीं है, ये एक तरह से देश को फिर से पुनर्जीवित करना था 

परन्तु ,अशोक गेहलोत और सचिन पायलट ने पुरे विपक्ष और विपक्ष के वोटर को निराश कर दिया है 
अंत्यंत शर्मनाक आदमी निकला अशोक गेहलोत 
इसको विशुद्ध नमक हरामी के अलावा कुछ नहीं है 




Sunday, August 21, 2022

Who is Anurag Kashyap???????

 



Anurag who has 22 movies as director of which just want to mention some of them.....
No Smoking, DevD, Gulaal,The Girl in Yellow boot, Gang of Wasseypur,Lust Stories......

Aamir,Udaan, Wasseypur, Shahid, Lunchbox, Queen, Ugly, Masaan, Udta Punjab, Bhavesh Joshi was the one which came out of Anurag When he was director or producer.


Satya, Shool,Nayak,Water, Yuva,Honeymoon Travels Pvt Ltd were some of the movies whose writer/script writer and dialogue credit goes to Anurag Kashyap......
Apart from the above movies as writer/Screenwriter or dialogue writer, he did the same job for the movies that he directed......

Total of 110 movies are the one in which Anurag is involved.....


This brilliant Film maker hail from Uttar Pradesh, Gorakhpur.....
Looking at his profile.....he didn't belong to a Poor family......
But the thing to be noted is he does not have a family background linked to Bollywood.

But the changes that Anurag Kashyap and his contemporary director brings to Bollywood has let the Mumbai industry to work smoothly for about 10-15 years.......



Can anyone believe that 110 movies has Anurag in it who doesn't belong to Mumbai.
Uttar Pradesh is very much proud on him that he has such a brilliant talent,,,,,
some are the epic one which every other director are jealous that why they were not involved in them......

Thursday, August 4, 2022

महाभारत का निचोड़

 महाभारत का निचोड़ 

  • भगवान् व्यास , पराशर के पुत्र थे
  • भगवान् व्यास ने ही महाभारत ग्रन्थ की रचना की 
  • उन्होंने सबसे पहले ब्रह्मा से निवेदन किया की वो महाभारत को लिखे 
  • भगवान् ब्रह्मा ने उनको भगवान् गणेश की उपासना करने का निर्देश दिया 
  • भगवान् गणेश ने उनसे शर्त रखी की वो एक साथ लिखना शुरू करेंगे और बीच मै कहीं नहीं रुकेंगे 
  • आपसी सहमति होने के भगवान् गणेश ने महाभारत ग्रन्थ लिखा जोकि व्यास द्वारा उनको सुनाया गया था 




  • व्यास ने महाभारत का ज्ञान सबसे पहले अपने पुत्र सुका को दिया 
  • नारद मुनि ने महाभारत का ज्ञान देवो को सुनाया 
  • सुका ने महाभारत का ज्ञान गन्धर्व ,राक्षस और यक्षास को दिया
  • वैसम्पयाना ने महाभारत का ज्ञान सबको दिया और उनका उद्देशय था मानव जाती का कल्याण
  • वैसम्पयाना ने महाभारत का ज्ञान राजा जन्मेजय को भी दिया 
  • जन्मेजय ,राजा परीक्षित के पुत्र थे जो की कुरु राज्य के  राजकुमार थे 

Thursday, March 10, 2022

मेरी राय

लोकनीति-CSDS Post Poll Survey का नतीजा आ गया
शायद सारे सर्वे एजेंसी मै सबसे ज्यादा विश्वस्त यही रहता है
सारी सर्वे एजेंसी एक ही दिशा मै बह रही है और भाजपा को पूर्ण बहुमत से जीता रही है | 
मन निराश है,कुछ समझ नहीं आ रहा है की जनता को क्या हो गया है या मैं अपनी राय जनता पे थोपना चाहता हूँ
खैर उनका आकलन अपनी जगह है
मै नतीजे आने के सात घंटा पहले रात १ बजे बस अपनी राय रखने लायक बचा हूँ और शायद लिख के अपने मन को शांत करता हूँ 
मेरा आकलन है की चार राज्यों मै कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनेगी
मणिपुर , गोवा , पंजाब और उत्तराखंड मै कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी
मेरी राय है की बड़ी पार्टी और सरकार बनाने मै कोई सम्बन्ध नहीं है
रहा सवाल मेरे सबसे प्रिय प्रदेश का
उत्तर प्रदेश मै सपा सबसे बड़ी पार्टी रहेगी
और अगर नहीं रही तो भाजपा को दो सौ से २० सीट ज्यादा नहीं मिलने वाली
मतलब हद से हद 220


मेरी राय कैसे बनी उसके प्रमुख कारण मेरी सीमित समझ से निम्नलिखित है

  1. सत्ता पक्ष के खिलाफ रोष - ये तो होना ही चाहिए
  2. किसान आंदोलन का असर - १ साल से ज्यादा किसान दिल्ली की सीमा पर बैठे रहे
  3. केंद्र के स्तर से बेरोजगारी - भाजपा सरकार केंद्र के स्तर से ही इस समस्या से झुझ रही है
  4. राज्य के स्तर से बेरोजगारी - जहाँ जहाँ भी सरकार सत्ता पक्ष मै है ,बेरोजगारी समस्या तो दिखती ही है
  5. मुसलमानों के ख़िलाफ़ केंद्र द्वारा घृणा का नंगा प्रचार और प्रसार
  6. मुसलमानों के प्रति राज्य सरकार का केंद्र के पद चिन्हो पर चलना
  7. कोरोना प्रबंधन - कोरोना महामारी मै राज्य और केंद्र की नाकामी जो प्रथम दृष्टया सबने देखी
  8. कोरोना के कारण मजदूर वर्ग की घर वापसी
  9. देहात मै छूटा पशु
  10. महंगाई - ये मेरे हिसाब से सबसे बड़े मुद्दों मै से एक है - पेट्रोल ,डीजल , रसोई गैस और खाद्य तेल। डीजल से न केवल भाड़ा बढ़ता है परन्तु किसानी की लागत भी बढ़ जाती है|अगर डीजल महंगा है तो खाद्य सामग्री भी बढ़नी ही बढ़नी है | खेती मै प्रयोग होने वाली खाद्य या यूरिया का महंगा होना|
  11. राज्य स्तर के शीर्ष नेताओ द्वारा लगातार अमर्यादित शब्दो का प्रयोग जैसे अजय बिष्ट द्वारा दिखाया गया अहम् जो उन्होंने इतनी नाकामियों के बाद भी प्रदर्शित किया
  12. राज्य सरकार का एक स्वर्ण जात विशेष के प्रति झुकाव - मेरा मत है की सरकार द्वारा ऐसा प्रदर्शित होने के कारण आप बाकी स्वर्ण समाज मै अपनी छवि धूमिल करते है और साथ मै निचले तबके द्वारा भी अस्वीकार्य हो जाते है
मेरी समझ कहती है जब ऐसे ज्वलंत मुद्दे हो तो विपक्ष को कुछ करने की भी जरूरत नहीं होती है , वहां पे जनता ही अपना बदला या प्रतिशोध ले लेती है|
किसी राज्य की जनता अगर ५ साल लगातार इस दौर से गुजरी हो तो मेरी समझ कहती है की जनता विपक्ष का चेहरा भी नहीं देखती| उसका एक मात्र मकसद होता है सत्ता परिवर्तन|
जाति गत समाज होने के बावजूद उत्तर प्रदेश की जनता ऐसे मुद्दों से लड़ाई कर रही थी|
क्या जातियाँ सब भूल के मतदान करेगी ?????लगता तो नहीं है

मेरी सीमित समझ कहती है की ऐसी ज्वलंत परिस्थिति मै हिन्दू मुसलिम ध्रुवीकरण चल ही नहीं सकता|
मै ये नहीं कह रहा हूँ की हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण का वोट नहीं डलेगा पर वो बहुत सीमित होगा|
सीमित का मतलब 2017 के ध्रुवीकरण के मत प्रतिशत से कम होगा | 
ध्रुवीकरण का असर की पूर्णता की भी सीमा होती है और वो स्तर आ चूका था वो बहुत पहले| 
बाबरी मस्जिद के टूटने के बाद भी भाजपा सत्ता मै लौट नहीं पायी थी | 
 
आगे कहना चाहूंगा की ऐसी स्थिति मै लाभार्थी वर्ग का प्रभाव भी सीमित ही रहता है|

साथ मै जोड़ूंगा की जब भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता मै 2017 मै आयी तब वो सब वर्गों का करीब करीब सब वोट ले लिया था ,मुस्लिम समाज का निकल दे तो|
तो सामान्य समझ कहती है की इतनी मजबूत पार्टी कमज़ोर ही होगी|
अब ५ साल मै ऊपर दिए मुद्दों के कारण क्या वोट की टूटन नहीं होगी?
भाजपा का जो नया मतदाता था वो एकदम नया था, वो कोई समर्पित वोट नहीं था| उसका समर्पण आप अटूट नहीं मान सकते|
वो छिटकेगा ही छिटकेगा|
क्यों छिटकेगा?
ऊपर दिए मुद्दों के कारण

साथ मै भाजपा के करीब करीब १० प्रत्याशियों द्वारा अपने छेत्र मै खदेड़े जाना या माफ़ी माँगना या जनता द्वारा अस्वीकृत होने का रोष खुल के कैमरे पर प्रदर्शित करना आपको एक रुझान तो दीखता ही है की भाजपा कमज़ोर हुई है |
साथ मै एक ये हवा हर तरफ बह रही थी की जनता मै विधायक के खिलाफ रोष था| 

सपा के पक्ष मै जातियों का गुलदस्ता भी उनके लिए मददगार ही होगा |
सपा के पक्ष मै मुसलमानों की एकता पर भी सबका एक मत है | 


2017 मै भाजपा का मत प्रतिशत 41 था और सपा का 29 था | 
आप कहेंगे की सपा का २२ था पर वो नहीं था | क्यों की 22 प्रतिशत का मत 403 विधानसभाओं पर था पर उसने तो केवल 310 पर अपने प्रत्याशी को उतरा था | 

C Voter का opinion poll ने दिखाया की सपा 35 प्रतिशत तक थे और भाजपा 40 पर ही तिकी रही | 
सपा का 35 प्रतिशत 22 से बड़ा | 
पर मेरे हिसाब से सपा तो 29 पर थी | आप को उस हिसाब से 35 प्रतिशत पर 7 प्रतिशत को जोड़ना पड़ेगा | 
चुनाव शुरू होने से पहले सपा 42 पर थी और भाजपा 40 पर थी | 



अब निर्णय आएंगे तो देखना होगा की क्या होता है | 


Tuesday, March 8, 2022

UP Election Survey Courtesy-

भाजपा -189 
अपना दल -8 
निषाद -3 
सपा -159 
रालोद -19 
SBSP -5 
बसपा -8 
कांग्रेस -8 
जनसत्ता दल -२ 
निर्दलीय -1 




Ground Zero Research Survey

 


Wednesday, March 2, 2022

भाई चुनाव कौन जीतेगा

 


उत्तर प्रदेश चुनाव चल रहा है और सबका एक ही सवाल है की जीत कौन रहा है ?????

कोई कहेगा की भाजपा जीत रही है और कोई कहेगा की सपा | 

चुनाव का असली अर्थ है की क्या आप अपने प्रतिनिधि से खुश है की नहीं ?

क्या जो सरकार आपने पिछली दफा चुनी थी वो सही काम कर रही है या नहीं ?

अगर आपको कोई फर्क नहीं पड़ा तो आप वर्तमान सरकार को अपना कीमत वोट दे देंगे और अगर आप के दिमाग मै संदेह है तो आप उसके विपरीत वोट दे देंगे | 

उत्तर प्रदेश आज भी एक जातीगत समाज है 


Thursday, February 24, 2022

राजनाथ सिंह भी भाजपा से है

Rajnath Singh



मिलेगी मिलेगी 
जरूर मिलेगी बेटा 

ना ना ना …. मिलेगी मिलेगी 
थोड़ा कोरोना के कारण दिक्कत हो गयी है 

आगे वो कहते है की कोई लड़के को परेशान नहीं करेगा 
न कोई उसपे कार्यवाही करेगा 

ये जवाब राजनाथ सिंह का था जब वो एक चुनावी रैली सम्बोधित कर रहे थे 
और एक युवक ने उनसे पूछ लिया की सेना की भर्ती निकालो 

कितना मार्मिक जवाब था जो उस बेरोजगार युवक को कुछ सांत्वना का काम किया होगा 
शायद कोई पिता अपने बेटे को समझाता तो ऐसा ही जवाब देता 

मेरे अनुसार ऐसा जवाब कोई सच्चा जनता का प्रतिनिधि ही दे सकता है 
जो शायद रोज़गार देने का समय आता तो वो ईमानदारी से काम करता 




मुझे याद है की ऐसी ही परिस्थिति मै उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे 
उनके मुख से निकला की ऐ लड़के ऐसा कर दूंगा की पूरी ज़िन्दगी बेरोजगार रहोगे 
आगे कहते हुए उन्होंने ने कहा की ऐसे लड़को की पहचान रैली शुरू होने से पहले कर देना चाहिए 

ये दोनों वाकया एक ही जैसा है 
आप पर छोड़ता हूँ की आप तय करिये की आपका प्रतिनिधि कैसा होना चाहिए 
क्या होनी चाहिए उसकी वाणी 
कैसा होना चाहिए उसका व्यवहार 

शायद वाणी और व्यवहार से ही आप प्रथम धृष्ट्या किसी आदमी को थोड़ा बहुत जान सकते है 




Wednesday, February 23, 2022

बेशर्म राजनीती की उपज राजेश्वर सिंह



ED के डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त राजेश्वर सिंह रिटायर हुए और एक घंटे बाद भाजपा मै शामिल हो गए और सरोजनी नगर विधानसभा से टिकट प्राप्त कर लिए| 
मुझे ठीक से तो पता नहीं,पर,शायद,वो १५ साल सरकार के द्वारा आसीन पद पर थे | 
एक बात उठती है की वो क्या करते थे १५ साल ?
क्या केवल १५ साल भाजपा के कार्यालय से निर्देश प्राप्त करके कार्य करते थे ?

बेशर्मी की सीमा पार कर चूका है समाज 
ये समाज को पता ही नहीं क्या चल रहा है 

एक बार अपने आप से पूछिए की राजेश्वर जी करते क्या थे ?
कहीं वो केवल राजनीती ही तो नहीं करते रहे 
अजीब जगह पहुंच गया है समाज 

यहाँ ये बात भी कर देनी चाहिए की राजेश्वर जी की धर्म पत्नी भी उत्तर प्रदेश सरकार मै IG के पद पर आसीन है 

अब पति भाजपा मै 
पत्नी सरकारी पद पर 

आप समझ रहे है  मै क्या बोलना चाह रहा हूँ 

मुझे तो इस तरह के खाके से ज्यादा पसंद तो सरोजनी नगर की पूर्व विधायक स्वाति सिंह और उनके पति दया शंकर सिंह लगते है 
कम से कम राजनीती करते है 
ना की 

सरकारी कार्यो को प्रभावित 

Sunday, February 6, 2022

२०२२ उत्तर प्रदेश चुनाव : नफरत का World Cup



उत्तर प्रदेश चुनाव :नफरत का कुंभ 

केशव प्रसाद मौर्य

उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सबसे पहले तीन दिसंबर को प्रयागराज में आयोजित व्यापारियों के सम्मेलन में कहा, '2017 विधानसभा चुनाव से पहले लुंगी छाप और जालीदार टोपी लगाए गुंडे बन्दूक गोली लेकर व्यापारियों को डराने का काम करते थे. बीजेपी ने इन लोगों से निजात दिलाई है।'
केशव प्रसाद मौर्या ने आगे बोला 2017 के पहले यूपी में लूंगी छाप और जालीदार टोपी पहने गुंडे ही घूमते थे। इन गुंडों से सबसे ज्यादा त्रस्त व्यापारी थे।

योगी आदित्यनाथ 

या तो हारने का डर  बैठ गया है या जीत का अति आत्मविस्वास होगा की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 
  • आगरा मै बोला की १० मार्च को बुलडोज़र चलेगा | 

मुख्यमंत्री आगे बढ़ते हुए बोले की समाजवादी पार्टी के नेतृत्व गुंडा ,मवाली और माफिया है  | 

  • लाल टोपी मतलब दंगाई हिस्ट्री शीटर
कैराना मै बोलते हुए वो कहे की 
  • मुजफ्फरनगर मै जितनी गर्मी दिखाई दे रही है वो सब १० मार्च के बाद शांत हो जायेगी | 
योगी जी ने बोला की वो जानते है की 
  • कैसे जून जुलाई की गर्मी मै शिमला बना देते है | 
दूरदर्शन के प्रोग्राम मै बोलते हुए उन्होंने बोला की 
  • ये चुनाव ८० २० का है | 
८० २० को अगर और जाने की कोशिश करें तो ये सबको ज्ञात होगा की देश मै ८० फीसदी हिन्दू है और २० प्रतिशत मुसलमान |
योगी ने अंजना ओम कश्यप के साक्षत्कार मै मुसलमानो के लिए कहा की
  • वो कठमुल्ला है 
  • ‘'गजवा-ए-हिन्द' का सपना देखने वाले 'तालिबानी सोच' के 'मजहबी उन्मादी' यह बात गांठ बांध लें, वो रहें या न रहें, भारत शरीयत के हिसाब से नहीं, संविधान के हिसाब से ही चलेगा। जय श्री राम!’

नरेंद्र मोदी 

ये तो बात हुई राज्य स्तर के नेताओ की
अब बात करते है अपने प्रधान सेवक की 
वो कहते है की वो सोच रहे थे की अहमदाबाद बम धमाके मै आतंकवादी ने बम रखने के लिए साइकिल को ही क्यों चुना | 

अनुराग ठाकुर 

  • अखिलेश तुम आतंकवादी के मुकदमा वापस लेते थे, क्या सरकार बना के तुम उनको पदम्भूषण दोगे 
  • अखिलेश यादव के चार यार- गुंडे, आतंकी, माफिया और भ्रष्टाचार
  • सपा के आतंकी कनेक्शन पे अखिलेश चुप क्यों है ?
  • जिन्होंने रामभक्तों को भूना, कर दो उनका EVM सूना

डुमरियागंज से बीजेपी विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह

विधायक ने कहा कि अगर हिंदू कहीं जा रहा है तो उसकी रगों में 'मियां' का खून बह रहा है। 
वह देशद्रोही और जयचंद की नाजायज औलाद है।
अगर इतनी प्रताड़ना के बाद कोई हिंदू दूसरी तरफ जाए तो उसे मुंह नहीं दिखाना चाहिए।
आप में से कितने जयचंद हैं? 
मुझे उनके नाम दो और मैं उनका खून जांच कर देखूंगा कि वे हिंदू हैं या मियां। मैं उनका डीएनए टेस्ट करवाऊंगा।

अमेठी तिलाई विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा की अगर हमारे एक हिंदू भाई को भी छू लिया तो हम सबने चूड़ी नहीं पहनी है। हाथ तोड़कर, उखाड़कर फेंक देंगे।
हिंदुस्तान का हिंदू अगर जाग गया ना तो यह दाढ़ी यहां से नोचकर यहां पीछे चुटिया बना देगा, और हिंदुस्तान में रहना है तो राधे-राधे कहना होगा। वर्ना बंटवारे के समय जो सब पाकिस्तान गए थे, आप भी चले जाइए। यहां कोई जरूरत नहीं है।
जयचंद की नाजायज औलाद है. राघवेंद्र सिंह ने आगे कहा कि 'इतने अत्याचार के बाद भी हिंदू दूसरी तरफ जाता है, तो उसको सड़क पर मुंह दिखाने लायक नहीं रखना चाहिए.


आखिरी मेरे शब्द 
मेरी टिप्पड़ी इसपे और करने के लिए नहीं बचती 
काफी भयावह बयान दिया जो समाज मै केवल बटवारा ही बढ़ाता है,न की कोई चुनाव जीतता है 
चुनाव तो आएंगे जायेगें, भाजपाई और सपाई को रहना यही है और आपस मै रहना है 
चुनाव तो आएंगे जायेगें, हिन्दू और मुसलमान को रहना यही है और आपस मै मिलजुल के ही रहना है