Monday, November 28, 2022

GITA 9-26

पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति |

तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन: || 26||


जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्धबुद्धि निष्काम प्रेमी भक्त का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुणरूप से प्रकट होकर प्रीतिसहित खाता हूँ॥26॥

GITA 9-34

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।

मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥९-३४॥

मन्मना भव मदभक्तों मधाजी मां नमस्कुरु | 
मामे वैष्यसि वुक्त्वैवम आत्मनः मत्परायण || 

मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो, मुझको प्रणाम कर। इस प्रकार आत्मा को मुझमें नियुक्त करके मेरे परायण होकर तू मुझको ही प्राप्त होगा॥34॥

मन्मना भव मदभक्तों मधाजी मां नमस्कुरु | 
मामे वैष्यसि वुक्त्वैवम आत्मनः मत्परायण || 

Sunday, November 20, 2022

GITA 9/22

अनन्याश्र्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् || २२ ||


अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते | 
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम || 


किन्तु जो लोग अनन्यभाव से मेरे दिव्यस्वरूप का ध्यान करते हुए निरन्तर मेरी पूजा करते हैं, उनकी जो आवश्यकताएँ होती हैं, उन्हें मैं पूरा करता हूँ और जो कुछ उनके पास है, उसकी रक्षा करता हूँ |



GITA 2-23

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: |

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत: || 23||

इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते और न अग्नि इसे जला सकती है जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।।