Tuesday, May 30, 2023

देश का सड़ता अगड़ा समाज

 देश का सड़ता अगड़ा समाज





जब जब भारतवर्ष के काल खंड को याद किया जाए , तो ये सोचिये , ये कैसे हुआ...... 
हम कैसे ग़ुलाम हुए, क्यों ग़ुलामी मै जिए , क्यों हमे गुलामी पसंद आने लगी...... 
कैसे ये अगड़ा समाज हमेशा आगे रहा...... 


अगड़ा समाज हमेशा भक्ति की धारा मै रहने वाला दीखता है |  इस समाज के लोग ज्यादा बड़-चढ़ के अपने धर्म और मान्यताओ का प्रदर्शन करते है | 
साथ ही भारत की जाति व्वयस्था भी अगड़ो को अपने आपको को उच्चता का अनुभव करवाती है | वो हर समय, हर पहर जाती-व्यवस्था के कारण एक अलग लोक का भ्रमण करते रहते है | 
अपने गांव ,पिंड, शहर और नगर मै कई सालो की कड़ी मेहनत से ऐसी व्वयस्था बना दिए है की हर कोई उनको सलाम ठोकता है | 
राज सत्ता के समय वो राजा हुआ करते थे, उन्ही का समाज हर संसाधन पर काबिज रहता था , 
वो जितना चाहते थे, उतना ही सबको वितरित करते थे | 

कई सालो ऐसी व्वयस्था रही जिसमे अगड़े, पिछडो पर पूरी तरह से काबिज थे | 
ज़मीन अगड़ो की , जंगल अगड़ो का , पानी अगड़ो का, गौ वंश अगड़ो का , जानवर अगड़ो का, साधन अगड़ो का , संसाधन अगड़ो का, विद्या अगड़ो की , विद्या अर्जन का हक़ अगड़ो का......

अगड़े एक राजसी व्वस्था का भोग करने के लिए ही भगवन द्वारा पृथ्वी पर भेजे गए हो | 
उनके अंदर एक देवत्वव का भोग आना लाजमी हो गया |
और एक तरह से ये एक भ्रम है और इसमें कई हज़ार साल जीने के कारण उनको इसकी आदत लग गयी है | 

पूर्व के समय मै विद्या का हक़ होने के कारण उन्होंने अपने बच्चो की शिक्षा दी, उनको बोलने चालने काबिल बनाया , 
वे समाज मैं एकदम अलग दीखते थे ,

पैसे होने के कारण उनका पहनावा टिप टॉप रहता है, बाल कडे रहते थे, हाथों की उँगलियों मै अँगूठिया रहती है, कान मै बालियाँ रहती थी, और पैरों को ढकने के लिए अच्छे चप्पल रहते थे , चलते उस समय के वाहन से थे, उनका घर गांव मै सबसे बड़ा रहता था , जीवन यापन के लिए सारी सुख सुविधा रहती थी, खाने के लिए साफ़ और उच्च गुडवत्ता का पौष्टिक खाना रहता था , गांव की पूरी खेती के लिए उपयुक्त भूमि पर कब्ज़ा रहता था | 

पंडित जी , बाउ साहब, ठाकुर साहब के यहाँ काम करने वाले भी उसी गांव के पिछड़े रहते थे ,
जैसे घर का का करने के लिए मेहरीन कोई कुम्हार की बीवी रहती थी , मालकिन का पैर ग्वाले की बीवी दबाती थी , वाहन ,बाग़ बगीचे की सफाई कोई माली करता था | उनकी खेतीहर ज़मीन की बोवाई ,सिंचाई आदि आदि भी गांव के मज़दूर करते थे जो पिछड़े समाज से आते थे | 

गांव का जीवन बहुत संघर्ष से भरा रहता था, परन्तु अगड़े समाज की चिंता पिछड़े की तुलना न के 

Monday, May 29, 2023

महामहिम हमको माफ़ करना


 मई 28,2023  तारिख का अपना नसीब था | 
इस दिन देश अपनी पुरानी संसद की इमारत से निजात पा गया और देश को नया संसद भवन मिल गया | 
दिसंबर 10, 2020 को जब इसका शिलान्यास किया गया तब देश को नहीं पता था की आने वाले दिनों मै कोरोना अपना विकराल रूप धारण कर लगभग १ करोड़ लोगों को काल के मुँह मै धकेलने को तैयार था | 
मार्च 2020  मै कोरोना के कारण देश मै तालाबंदी कर दी गयी थी |  और अगले ३-४ महीने भारत मै सारा कारोबार बंद रहा , भारत के इतिहास की सबसे बड़ा पलायन हुआ , ना जाने कितने लोगों की मृत्यु हो गयी और उसका कारण था की भारत सरकार द्वारा की गयी  तालाबंदी जिसने लोगों से रोज़गार छीना और मजदूरों को घर लौटने पर मज़बूर कर दिया | 

देश ने इतना विषम समय अप्रैल 2020 से अगस्त 2020 तक देखा | 
तालाबंदी के कारण देश का खज़ाना केवल खाली हो रहा था ,उसमे आ कुछ नहीं रहा था | 
देश एक विषम परिस्थिति से गुज़र रहा था |  
देश मै सब बंद था , सरकारें अपना काम सुचारु रूप से कर सके उसके लिए पैसे के स्रोत खोज रही थी और यही वजह थी सब कारोबार बंद था लेकिन शराब का ठेका खुला रहा क्यों की सरकारों को समझ नहीं आ रहा था की सरकारी ख़ज़ाने मै पैसा कहाँ से लाये | 

अगस्त 2020 से 3 महीना गुज़रा और केंद्र सरकार को नयी संसद की जरूरत महसूस होने लगी | 
दिसंबर 10, 2020 को केंद्र सरकार के अगुवा प्रधानमंत्री ने उसका शिलान्यास कर दिया | 

अनुछेद 79 कहता है संघ के लिए एक संसद‌ होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोकसभा होंगे।
शिलान्यास हुआ तब सारे पुजारी और अतिथि नरेंद्र मोदी मास्क मै दिखे | 
विपक्ष को नहीं बुलाया गया कोरोना का बहाना बनाके |
देश मै अस्पताल , हवाई अड्डा , रेलवे स्टेशन , रेल गाड़ी , विश्वविद्यालय आदि आदि तो कई है परन्तु संसद भवन तो केवल एक ही रहेगा | 

पर उस संसद जो केवल एक रहेगी वहां राष्ट्रपति कोविंद को आमंत्रण नहीं भेजा गया | 

खैर लोकतंत्र के मंदिर मै पिछले छह महीने मैं क्या क्या हुआ उसका भी जिक्र होना जरूरी है उसके उदघाटन से पहले | 

हिंडेनबर्ग संस्था ने एक रपट छापी की अडानी का व्यवसाय मै भ्रष्टाचार भरा हुआ है|  उनके भाई,समधी और परिवार के अन्य लोग टैक्स हेवन देश मै फ़र्ज़ी कंपनी बना के काला धन को सफ़ेद कर रहे है  |

ये मुद्दा राहुल गाँधी ने लपक लिया |
देश के प्रधानमंत्री जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनकी काफी तस्वीर उपलब्ध है जिसमे वो अडानी के साथ हसी-ठिठोली करते दिख रहे है | साथ ही कहा जाता है की जब मोदीजी प्रधानंत्री के रूप मै चुने गए तब वो गुजरात से दिल्ली अडानी के निजी विमान से आये | 
राहुल गाँधी ने लोक सभा मै एक विस्तृति भाषण दिया जिस मै उन्होंने बताया की मोदीजी अपनी कई विदेश यात्रा मै अडानी को साथ लेके जाते थे ताकि उनका व्यवसाय बढ़ाया जा सके | 

उस भाषण को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के अभिलेख/पुरालेख से हटा दिया | 
यही वाकया राज्य सभा मै मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुआ , उनका भाषण  से भी अडानी शब्द हटा दिया | 

उसके बाद राहुल गाँधी का एक 2019 चुनाव मै दिए हुए भाषण की वजह से 2 साल की सजा हो गयी | उस मानहानि आरोप मै मिली सजाः आज तक के इतिहास मै सबसे कड़ी सजा है |

उसके बाद उस सजा की वजह से सरकार ने आनन् फानन मै उनका सरकारी आवास भी छीन लिया | 
यहाँ ये बताना जरूरी है की लाल कृष्ण अडवाणी , मुरली मनोहर जोशी और ग़ुलाम नबी आज़ाद आज भी अपने संसद आवास मै रह रहे है  और ये तीनो अब सांसद नहीं है | 
इसके बाद संसद का पूरा सत्र टाल दिया गया |

हमने ये भी देखा की राहुल गाँधी ब्रिटेन से वापस लौटे तब भाजपा के संसद उनसे माफ़ी मांगने के लिए संसद को नहीं चलने दिया  | 
मेरे स्मरण मैं ऐसा नहीं आता की सत्ता पक्ष ने कभी संसद को बाधित किया हो | 

ये सब अनैतिक संसदीय कार्य हो रहा था तभी नए संसद भवन का उद्घाटन की तारीख सामने आ गयी | 
लोकसभा अध्यक्ष ने सबको निमंत्रण दिया परन्तु किसी अज्ञात और अनजान संसय के कारण राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति को निमंत्रण  नहीं दिया | 

अतिथि देख के लगा की ओम बिरला ने काफी चिंतन मनन करके उनकी सूची बनायीं थी  | 
सारे भाजपा शाषित प्रदेशो के मुख्यमंत्री , उनका  मंत्री मंडल , भाजपा के सांसद , सारे पूर्वं प्रधानमंत्री , भाजपा के मार्ग दर्शक मंडल के मुरली मनोहर जोशी और साथ ही साथ पूर्व राष्ट्रपति कोविंद जी |

जिस समारोह मै पूर्व राष्ट्रपति मौजूद हो , परन्तु मौजूदा राष्ट्रपति मौजूद नहीं थे |

द्रौपदी मुर्मू जब राष्ट्रपति बनी तब भाजपा के सारे मौजूदा नेता ने खूब प्रचार किया की उन्होंने एक आदिवासी और एक महिला को प्रथम नागरिक बनाया | 
और जब संसद देश को सौंपी गयी तब हमारा राष्ट्रपति गायब था | 
उद्गाटन मै सब था , चमक थी, जश्न था, राष्ट्रपति के भाषण भी पड़ा गया पर खुद राष्ट्रपति नहीं था जो खुद दिल्ली के किसी कोने मै बैठा टीवी पर ये सब तमाशा देख रहा था | 
ये नयी संसद की तारिख याद रहे इसलिए इससे इसको लिखना जरूरी था | 

महामहिम हमको माफ़ करना