Wednesday, April 15, 2026

दिल के शब्द

ये एक अजीब सी चीज़ है जो मुझे सौपी जा रही है 
जैसे किसी शेर को बिना दाँत के बना दिया जाए 

इतना पेचीदा है भविष्य, इस संचालन मैं,की क्या बताऊ
देखिये आपकी वसीयत मैं ६ लोग है ,ठीक 
अब मेरी आदत समझिये, आपकी वसीयत की कोई तो मजबूती तो होगी ही न  
उस मजबूती के साथ अगर मैं खेला तो ईस्वर मुझे माफ़ नहीं करेगा 
और देखा जाए तो वो वसीयत बन गयी है 

अब आप बताइये की मेरे पास विकल्प क्या क्या बचा
केवल २ विकल्प 
पहला की मैं ये वसीयत को मान जाऊं 
दूसरा की मैं न मानू
मैंने दूसरा विकल्प चुनने का फैसला किया 

जब मैं उस सम्पति मैं १/६ या २/६ का हिस्सेदार हूँ , तो मुझे १/६ या २/६ का हिस्सा लेना ही नहीं 
न मैं उसको बेच सकता हूँ , किराये को ६ लोंगो मैं वितरित करना एक धार्मिक जरूरत बना दिया है 
तो मैं ऐसे पचड़े मैं हाथ ही क्यों डालूं 

बाकी मेरे और भी मतभेद है 
जैसे की १.५ करोड़ का ऐसे खर्च किया गया जैसे १००-१५० रुपए हो 
भाई मुझसे भी एक बार पूछ लेते , मैं ऐसा पागल भी तो नहीं हूँ 

मुझे अगर १ लाख की कभी जरूरत पड़ी होगी तो मुझे ये सन्देश मिलता था की मेरे पास नहीं है
मुझे इंजीनियरिंग के बाद १ साल तैयाररी करनी थी तो मुझे बताया गया की पैसा नहीं है, 
मेरी और बीटी की इंजीनियरिंग की पढ़ाई ऐसे करवाई गयी की जैसे सीनियर मैनेजर को कुछ मिलता ही नहीं है , अगर ऑडिट मैं न हो होते तो हम लोग पढ़ ही न पाते 


ले दे के ऐसी छवि बनायीं गयी की पैसे आपके पास है ही नहीं 
इसी छवि का नतीजा हुआ की मुझे ५ लाख का लोन अपनी शादी मैं लेना पड़ा ताकि जरूरी चीज़ें बिना सोचे समझे हो सके

पर जब आपने अयोध्या का काम अपने रिश्तेदार के कहने से शुरू करवा दिया , और मुझे पागल की भांति भनक तक न लगने दिया, तो मुझे लगा की पैसा तो आपके पास हमेसा से था परन्तु वो पैसा आपका था ,उसमे मेरा तो कोई हक़ ही नहीं था

अब थोड़ा आगे चलिए 
मैंने सुना है की मेरी माँ एक बार मेरी लड़की से कह रही थी की वो घर केवल तुम्हारा नहीं है, वो हम सबका ही है, जब उस घर के सिलसिले मैं हम अयोध्याजी रहने लगे 
ये जिक्र यहाँ इसलिए की वो घर तो अभी तक अपना स्वरुप भी नहीं लिया, न हमने उससे एक भी रुपया कमाया, तब आप सबका सोचना, ये था 

देखिये, जब घर का काम बीच मैं रुका तब मैं उसको बनवाने की सोचा , उसमे मेरा कोई अपना हित नहीं था, बल्कि अगर आप मेरी अन्तः-स्थिति को समझ सके तो यही होगी की पिताजी का काम शुरू हुआ है तो ख़तम करदूँ , वहां रहने मैं तो मेरा शारीरिक और आर्थिक नुक्सान ही हुआ होगा 
परन्तु माता जी के ये वचन मुझे सोचने पर मजबूर करते है की मैं ,आप और पुरे परिवार मैं विश्वास नहीं जगा सका 
जीवन पर्यन्त मेरी कोई डिमांड भी नहीं रही,परन्तु ये भरोसा , मैं जगा नहीं सका   
और हर महत्वपूर्ण और चुनती पूर्ण समय मैं मुझे अकेला छोड़ दिया गया , 

मेरे जीवन की सबसे चुनौती पूर्ण स्थिति मैं जब मुझे १-२ लाख रुपए नहीं मिलें,
न आप और मम्मी मैं जोखिम लेने का मातदा दिखा,
उस स्थिति को सोच के , ३६-३७ साल पर लगा की चलो पापा तैयार नहीं थे, कोई बात नहीं 
मम्मी को बोलना चाहिए था की मेरा ३-४ तोला सोना बेच के इसको पढ़ने दो,
परन्तु मम्मी ने ये तो बहुत बोला की उनके पास सोना बहुत है, पर वो शायद मेरे लिए नहीं था या मेरे लिए तब था, जब मुझे उसकी जरूरत ही नहीं रहेगी 

यहाँ पर कोई अपने को बेचारा समझे तो मैं उसको बताता चलूँ, 
हमारे किरायेदार के लड़के ने कोचिंग काकादेव से की, और पड़े गोरखपुर से, उनके पापा और गरीब थे
पिताजी के कई रिश्तेदार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई,प्रयागराज और तमाम जगह से की और उनको स्थिति हमसे ख़राब थी, या हमारे बराबर ही थी, 


ये जीवन है, यहाँ आपका समय तब तक ही है, जब तक आपकी उपयोगिता है,
मेरी उपयोगिता अब समाप्त हो गयी है 

अब अपनी मन के आवेग को विराम देता हूँ 
अब मैं अपनी वसीयत लिख देता हूँ और ये पहली ऐसी वसीयत होगी जिसमे पैसे का कोई लेन-देन नहीं होगा 
देखिये जब तक हूँ इस घर मैं, ठीक है, नहीं जमा तो कहीं और जाके रहूँगा, 
और मुझे आपसे एक पैसा भी नहीं चाहिए, 
आपके पास जो है, वो आप जिसको चाहे, उसको दे दीजिये, या उसके नाम कर दीजिये, 
जैसे वो बिल्डिंग, लखनऊ का घर , गाँव की जमीन, मम्मी का सोना और आपके पास जो भी पैसे हो  
मुझे अपने साथ केवल शिखा के घर से दिए हुए सोना दे दीजिये ताकि वो औरत कुछ पहन सके



एक बात और,मेरा आपसे रिश्ता कोई स्वार्थ का या आर्थिक नहीं था, 
मैं अपनी सांस की आखिरी हवा तक का साथ आपके ही साथ का रहेगा ,
परन्तु समय का चक्र आपको परिपक्व बनाता है , आप सोचते हो , तो आप किसी निष्कर्ष तक पहुँचते हो, ये सब निष्कर्ष मेरे विवेक ने मुझे बताया है 

Monday, April 13, 2026

ऑपरेशन सिन्दूर

  •  ऑपरेशन सिंदूर मै कुछ सरकारी बयान 
  • कुछ नुकसान हुआ है और युद्ध मै नुकसान होना नया नहीं है-भारती 
  • हां ,हमारे जेट गिरे,हमने ४८ घंटे मै जेट को सही किया ,अपनी रणनीति सही की और फिर युद्ध मै उतरे -cds 
  • राजनीति के कारण हमारे जेट गिरे,राजनीतिक नेतृत्व हमारे हाथ बाँधी थी -सिंगापुर मै सेना का अटैची 
  • आदम ज़माने के हथियार से हम युद्ध नहीं जीत सकते ,ड्रोन वगैहरा सबकी कमी है 
  • ऑपरेशन सिंदूर मै पाकिस्तान अकेले नहीं लड़ रहा था, पीछे से चीन पूरा इस युद्ध मै था 
  • एक भी आर्डर समय से पूरा नहीं रहे है ,६-७ साल से आर्डर गया है और आजतक सामना हमारे हाथ मै नहीं आया है 

2014 से भारत का सफर

  • अन्ना आंदोलन 
  • रामदेव का आंदोलन
  • मोदी का प्रधानमंत्री बनना 
  • मुस्लिमों की लिंचिंग की घटना 
  • मोदी द्वारा विदेश की नीति पर भारत को बदनाम करना 
  • प्रधानमंत्री द्वारा मनमोहन सिंह  और अन्य पूर्व प्रधानमंत्री के लिए अपशब्ध बोलना 
  • प्रधानमंत्री का सोनिआ-राहुल के लिए अप-शब्द 
  • प्रधानमंत्री के द्वारा स्वर्गीय राजीव गाँधी के लिए अप शब्द 
  • प्रधानमंत्री के द्वारा मुस्लिमो के लिए अप शब्द 
  • नोटेबंदी किसके लिए किया गया 
  • सरकारी कार्यक्रम बना के चुनाव रैली कर देना 
  • cbi ,ed ,rbi के प्रमुखों का इस्तीफा देना, एक प्रधानमंत्री के कार्यकाल मै 
  • शाहीन बाग़ का आंदोलन 
  • किसान आंदोलन 
  • किसान आंदोलन पर मीडिया का रुख, सरदारों को खुला खालिस्तानी घोषित कर देना 
  • मोदी के गालबाज मंत्री 
  • संसद मै विधूड़ी का बयान 
  • लोकसभा स्पीकरों द्वारा विपक्ष का शोषण करना 
  • मोदी द्वारा अपना धन पोषक मीडिया खड़ा करना 
  • सारे मोदी विरोधी पत्रकारों का इस्तीफा देना और उनका यूट्यूब पर आ जाना 
  • मोदी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश पर चले जाना 
  • मुख्य न्यायधीश का राज्य सदस्य बन जाना 
  • विपक्षी नेताओं का शोषण करना 
  • राहुल गाँधी का बंगला छीन लेना 
  • cbi ed का दुरुपयोग 
  • महाराष्ट्र ,कर्नाटक,बिहार,उत्तराखंड,मध्य-प्रदेश,राजस्थान की सरकार को पलटना 
  • चुनाव आयोग द्वारा मोदी सरकार के आगे नतमस्तक होना 
  • चंडीगढ़ का मेयर चुनाव 
  • पुलवामा के शहीदों पर वोट माँगना 
  • मोदी का बड़बोलापन वाले बयान 
  • मोदी की फ़ैल विदेश नीति 
  • मोदी द्वारा खुद का प्रचार करने पर अताह पैसा खर्च करना 
  • राम मंदिर मै आडवाणी ,जोशी,तोकड़िया को न बुलाना 
  • मोदी का कोविड पर कूप्रभंधन 
  • कोविड के समय देश के इतिहास का सबसे बड़ा पलायन 
  • कोविड मै ओक्सीजन न दे पाना 
  • कोविड के दौरान पश्चिम बंगाल का चुनाव करवा देना 
  • मोदी का मणिपुर को अपने हाल पर छोड़ देना 
  • नेपाल देश के द्वारा आँख दिखाना 
  • मोदी का चीन के सामने नतमस्तक हो जाना 
  • भारत का अपने किसी भी पडोसी के साथ अच्छे सम्बन्ध न होना 
  • अमरीका द्वारा भारत को बल भर गरियाना 

Sunday, April 12, 2026

ईरान-इजराइल/अमरीका युद्ध मैं भारत की चूक

 युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता और पुरे परिवार का निधन हो गया | 

और ये युद्ध अमरीका और इजराइल ने शुरू किया था| 


भारत सरकार ने तुरंत खामनेई की मौत का जिक्र तक नहीं किया | बाकी मुल्को ने खामनेई की मौत पर सांत्वना सन्देश भेजा था| 

परन्तु भारत ने अमरीका और इजराइल के दबाव मै एक सन्देश तक नहीं भेजा | 

जब सोनिया गाँधी का अखबार मै एक लेख लिखा और इस तरफ सरकार का ध्यान खींचा , इसके साथ ही विपक्ष ने अतिरिक्त दबाव बनाया, इसके बाद भारत सरकार जागी और अपने एक अधिकारी को ईरान दूतावास भेजा और शोक सन्देश लिखा | इस शोक सन्देश मै भी खामनेई का नाम नहीं लिखा | 


भारत की दूसरी गलती ,ये रही की प्रथम दृष्टया जो युद्ध शुरू करता है, दोषी भी वही रहता है| परन्तु भारत ने ये सच लिखने की भी हिम्मत नहीं जुटाई | भारत को इस युद्ध की शुरुआत करने के लिए इजराइल और अमरीका को दोष देते हुए एक सन्देश भेजना चाहिए था | 

ये हिम्मत भी न दिखाने का कारण भी ,अमरीका और इजराइल का दबाव ही था | 

तो यहाँ तक भारत ने २ गलती कर दी थी ,

  • पहली की खामनेई और परिवार की मौत पर शोक सन्देश न भेजना | 
  • दूसरा की अमरीका/इजराइल का युद्ध शुरू करने का विरोध तक न करना | 
अब भारत सरकार की अन्य गलती बतलाता हूँ ,
जब अमरीका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया , उससे ३६ घंटे पहले मोदी जी इजराइल मै कोई पहली दफा बना हुआ पुरस्कार प्राप्त कर रहे थे | 
इसी दौरान इजराइल की संसद मै मोदी जी ने इजराइल को fatherland बोल दिया | 
किसी से खुश हो जाओ और ऐसा बिछ जाओ, ये बहुत बड़ी कूटनीतिक गलती साबित हुई | 
पूर्व मै सबको याद होगा की ट्रम्प के पहले कार्यकाल मै मोदीजी के द्वारा ट्रम्प का चुनाव प्रचार कर रहे थे और वो चुनाव बिडेन जीत गए | 
फिर पांच साल ,अमरीका ने कई दफा भारत को बेइजत किया 
तो तीसरी गलती रही की मोदी का ३६ घंटे पहले इजराइल जाके,उसको मूक समर्थन देना और ईरान से अपनी दूरी और बड़ा ली | 

भारत की चौथी गलती ये रही की,
जयशंकर और अन्य अधिकारी द्वारा विदेश नीति बनवाना | मुझे ऐसा लगता है की जयशंकर जैसे रोबोट की जगह कोई राजनीतिक आदमी होता तो चीज़ बिलकुल अलग होती | 
इस युद्ध मै भारत को अपना पक्ष दोनों तरफ रखना चाहिए था | भारत को अपना पक्ष ईरान-इजराइल और अमरीका सबकी तरफ रखना चाइये था | 
परन्तु विदेश नीति बनाने वालों को लगा अमरीका/इजराइल ,दो - तीन दिन मै युद्ध खत्म कर देंगे | परन्तु ऐसा नहीं हुआ | 
युद्ध ४० दिन से ज्यादा चल रहा है , हमारे पूर्व मै  ईरान के साथ सम्बन्ध मधुर रहे है | ईरान कई दशकों से ईरान से कच्चा तेल ले रही है और २०१९ तक तेल लेता रहा है | 
पर भारत की सरकार की दक्षिणपंथी नीति , की ईरान एक मुस्लिम राष्ट्र है,इससे हमको दूर रहना चाहिए | 
बाकी गलतियां भारत की रही ,
चौथी गलती रही की पूर्व राजनायिक को विदेश मंत्री बनवा देना | 
पांचवी गलती रही की घरेलु मुस्लिम विरोधी छवि को सुधारने या और पक्का करने के लिए, विदेश नीति बनाना | 
छथि गलती रही की भारत का अत्यधिक अमरीका से भयभीत हो जाना 




भारत कहाँ है?

 भारत कहाँ है?

 

भारत की २०१४ के बाद की नीति पूरी तरह दक्षिणपंथी रही है| उसकी नीतियों पर हिंदुत्व का प्रभाव बड़ी तौर पर दिखता हैं | 

भाजपा सरकार का सीधा लक्ष्य ये होता है की वो किसी भी तरह से इस्लाम पर प्रहार कर सके| 

भाजपा सरकार के इर्दगिर्द एक दक्षिण पंथी बुध्जीवी बैठे है जो उससे इसी दिशा पर राइ देते है |

 इसके कारण भारत एक लकवाग्रस्त राष्ट्र बनता जा रहा है | जब दिशा ही गलत हो तो लक्ष्य प्राप्ति की योजना भी गलत ही बनती है | 

मुसलमान धरम के लोंगो को कट्टरपंथी ,जिहादी, रोहिंगिया,घुसपैठिया ,मियां आदि आदि गाली से दक्षिणपंथी पुकारते है | 

इसी दिशा मैं भारत ने अपनी विदेश नीति मै एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है | 

भारत का इजराइल से बेहिसाब चिपकना सीधे-

सीधे ये दिखता है की उसकी विदेश नीति भी हिंदुत्व की दिशा मै बड़ रही है | 


आप देखिये की नए भारत ने अपनी सारी ऊर्जा अमरीका को खुश करने मै लगा दी हैं | भारत का अमरीका की तरफ का झुकाव का कारण भी पाकिस्तान ही है | 

किसी राजनियक ने भारत की सरकार को ये समझा दिया है की अमरीका-पाकिस्तान मै दूरी लायी जाए ,जिससे अमरीका का झुकाव भारत की तरफ करवा दिया जाए | 

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत सरकार अजीब तरह से अमरीका के सामने झुक गया | ट्रम्प ने 70 बार बहुत बुरा-भलाबोला परन्तु भारत ने भी टिपण्णी नहीं की | 

भारत सरकार ने भारत के स्वाभिमान को गिरवी रख दिया | 140 करोड़ की जनता चुप रहने के अलावा कुछ नहीं कर पायी | 

भारत का झुकना या रेंगना आपको न अमरीका के करीब ला पाए, बल्कि आपको नुक्सान ही कर दिया | 

अंदरूनी राजनीती साधने मै पाकिस्तान सबसे आसान तरीका है | पाकिस्तान को साधते रहो ,और भारतीय अब्दुल टाइट होता रहेगा | 

आज पाकिस्तान अमरीका-इजराइल-ईरान मै मध्यस्थ बन बैठा है | वो ईरान-इजराइल और अमरीका की जंग रुकवा रहा है | अमरीका का उपराष्ट्रपति इस्लामाबाद मै बैठा था| 

जो भारत अपनी तुलना पाकिस्तान से करता है और कहता है की पाकिस्तान मै आटा नहीं है,टमाटर नहीं है,पेट्रोल नहीं है,वही पाकिस्तान आज विश्व की खबरों मै बना हुआ है | 

भारत का विपक्ष,इस्लामाबाद सम्मलेन पर भाजपा को घेरा जाना इसलिए है की भाजपा हमेसा पाकिस्तान को बदनाम करता रहा है | अब विपक्ष चिड़ा रहा है की भाजपा अब बोलो, मोदी ये क्या हो रहा है पाकिस्तान मै | 

भारत का मीडिया कह रहा है की अमरीका का उपराष्ट्रपति जे डी vance की सुरक्षा पाकिस्तान मै खतरे मै है | 

यहीं लाइन सरकार ने दी है मीडिया को, तो अब उनको यहीं बोलना होगा | खैर,बेशर्मी की भी सीमा होती है |

इस मीडिया को ये याद दिलाना चाहिए की जब ट्रम्प ,भारत आये थे, तो CAA NRC दंगे शुरू हो गए थे | ट्रम्प जैसे ही भारत आये थे , तो नई दिल्ली मै दंगे शुरू हो गए और वो दंगे तब तक हुए जब तक ट्रम्प यहाँ थे | पूरा विश्व का मीडिया ये नंगा नाच देख रहा था | जितने दिन ट्रम्प नई दिल्ली मै रहे ,तब तक ये दंगे चलते रहे, और जब ट्रम्प चले गए,तब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने shoot and sight order  दिया और दिल्ली दंगा रुका |