Monday, May 29, 2023

महामहिम हमको माफ़ करना


 मई 28,2023  तारिख का अपना नसीब था | 
इस दिन देश अपनी पुरानी संसद की इमारत से निजात पा गया और देश को नया संसद भवन मिल गया | 
दिसंबर 10, 2020 को जब इसका शिलान्यास किया गया तब देश को नहीं पता था की आने वाले दिनों मै कोरोना अपना विकराल रूप धारण कर लगभग १ करोड़ लोगों को काल के मुँह मै धकेलने को तैयार था | 
मार्च 2020  मै कोरोना के कारण देश मै तालाबंदी कर दी गयी थी |  और अगले ३-४ महीने भारत मै सारा कारोबार बंद रहा , भारत के इतिहास की सबसे बड़ा पलायन हुआ , ना जाने कितने लोगों की मृत्यु हो गयी और उसका कारण था की भारत सरकार द्वारा की गयी  तालाबंदी जिसने लोगों से रोज़गार छीना और मजदूरों को घर लौटने पर मज़बूर कर दिया | 

देश ने इतना विषम समय अप्रैल 2020 से अगस्त 2020 तक देखा | 
तालाबंदी के कारण देश का खज़ाना केवल खाली हो रहा था ,उसमे आ कुछ नहीं रहा था | 
देश एक विषम परिस्थिति से गुज़र रहा था |  
देश मै सब बंद था , सरकारें अपना काम सुचारु रूप से कर सके उसके लिए पैसे के स्रोत खोज रही थी और यही वजह थी सब कारोबार बंद था लेकिन शराब का ठेका खुला रहा क्यों की सरकारों को समझ नहीं आ रहा था की सरकारी ख़ज़ाने मै पैसा कहाँ से लाये | 

अगस्त 2020 से 3 महीना गुज़रा और केंद्र सरकार को नयी संसद की जरूरत महसूस होने लगी | 
दिसंबर 10, 2020 को केंद्र सरकार के अगुवा प्रधानमंत्री ने उसका शिलान्यास कर दिया | 

अनुछेद 79 कहता है संघ के लिए एक संसद‌ होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोकसभा होंगे।
शिलान्यास हुआ तब सारे पुजारी और अतिथि नरेंद्र मोदी मास्क मै दिखे | 
विपक्ष को नहीं बुलाया गया कोरोना का बहाना बनाके |
देश मै अस्पताल , हवाई अड्डा , रेलवे स्टेशन , रेल गाड़ी , विश्वविद्यालय आदि आदि तो कई है परन्तु संसद भवन तो केवल एक ही रहेगा | 

पर उस संसद जो केवल एक रहेगी वहां राष्ट्रपति कोविंद को आमंत्रण नहीं भेजा गया | 

खैर लोकतंत्र के मंदिर मै पिछले छह महीने मैं क्या क्या हुआ उसका भी जिक्र होना जरूरी है उसके उदघाटन से पहले | 

हिंडेनबर्ग संस्था ने एक रपट छापी की अडानी का व्यवसाय मै भ्रष्टाचार भरा हुआ है|  उनके भाई,समधी और परिवार के अन्य लोग टैक्स हेवन देश मै फ़र्ज़ी कंपनी बना के काला धन को सफ़ेद कर रहे है  |

ये मुद्दा राहुल गाँधी ने लपक लिया |
देश के प्रधानमंत्री जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनकी काफी तस्वीर उपलब्ध है जिसमे वो अडानी के साथ हसी-ठिठोली करते दिख रहे है | साथ ही कहा जाता है की जब मोदीजी प्रधानंत्री के रूप मै चुने गए तब वो गुजरात से दिल्ली अडानी के निजी विमान से आये | 
राहुल गाँधी ने लोक सभा मै एक विस्तृति भाषण दिया जिस मै उन्होंने बताया की मोदीजी अपनी कई विदेश यात्रा मै अडानी को साथ लेके जाते थे ताकि उनका व्यवसाय बढ़ाया जा सके | 

उस भाषण को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के अभिलेख/पुरालेख से हटा दिया | 
यही वाकया राज्य सभा मै मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुआ , उनका भाषण  से भी अडानी शब्द हटा दिया | 

उसके बाद राहुल गाँधी का एक 2019 चुनाव मै दिए हुए भाषण की वजह से 2 साल की सजा हो गयी | उस मानहानि आरोप मै मिली सजाः आज तक के इतिहास मै सबसे कड़ी सजा है |

उसके बाद उस सजा की वजह से सरकार ने आनन् फानन मै उनका सरकारी आवास भी छीन लिया | 
यहाँ ये बताना जरूरी है की लाल कृष्ण अडवाणी , मुरली मनोहर जोशी और ग़ुलाम नबी आज़ाद आज भी अपने संसद आवास मै रह रहे है  और ये तीनो अब सांसद नहीं है | 
इसके बाद संसद का पूरा सत्र टाल दिया गया |

हमने ये भी देखा की राहुल गाँधी ब्रिटेन से वापस लौटे तब भाजपा के संसद उनसे माफ़ी मांगने के लिए संसद को नहीं चलने दिया  | 
मेरे स्मरण मैं ऐसा नहीं आता की सत्ता पक्ष ने कभी संसद को बाधित किया हो | 

ये सब अनैतिक संसदीय कार्य हो रहा था तभी नए संसद भवन का उद्घाटन की तारीख सामने आ गयी | 
लोकसभा अध्यक्ष ने सबको निमंत्रण दिया परन्तु किसी अज्ञात और अनजान संसय के कारण राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति को निमंत्रण  नहीं दिया | 

अतिथि देख के लगा की ओम बिरला ने काफी चिंतन मनन करके उनकी सूची बनायीं थी  | 
सारे भाजपा शाषित प्रदेशो के मुख्यमंत्री , उनका  मंत्री मंडल , भाजपा के सांसद , सारे पूर्वं प्रधानमंत्री , भाजपा के मार्ग दर्शक मंडल के मुरली मनोहर जोशी और साथ ही साथ पूर्व राष्ट्रपति कोविंद जी |

जिस समारोह मै पूर्व राष्ट्रपति मौजूद हो , परन्तु मौजूदा राष्ट्रपति मौजूद नहीं थे |

द्रौपदी मुर्मू जब राष्ट्रपति बनी तब भाजपा के सारे मौजूदा नेता ने खूब प्रचार किया की उन्होंने एक आदिवासी और एक महिला को प्रथम नागरिक बनाया | 
और जब संसद देश को सौंपी गयी तब हमारा राष्ट्रपति गायब था | 
उद्गाटन मै सब था , चमक थी, जश्न था, राष्ट्रपति के भाषण भी पड़ा गया पर खुद राष्ट्रपति नहीं था जो खुद दिल्ली के किसी कोने मै बैठा टीवी पर ये सब तमाशा देख रहा था | 
ये नयी संसद की तारिख याद रहे इसलिए इससे इसको लिखना जरूरी था | 

महामहिम हमको माफ़ करना 

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