Tuesday, February 25, 2020

सनातन हिन्दू धर्म की मनुस्मृति मैं परिभाषा

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् ।
प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् , एष धर्मः सनातन: ॥

सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये ।
प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये ; यही सनातन धर्म है ॥
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