प्रियं च नानृतम्
ब्रूयात् , एष धर्मः
सनातन: ॥
सत्य बोलना चाहिये,
प्रिय बोलना चाहिये,
सत्य किन्तु अप्रिय
नहीं बोलना चाहिये
।
प्रिय किन्तु असत्य
नहीं बोलना चाहिये
; यही सनातन धर्म
है ॥
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