Sunday, April 12, 2026

ईरान-इजराइल/अमरीका युद्ध मैं भारत की चूक

 युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता और पुरे परिवार का निधन हो गया | 

और ये युद्ध अमरीका और इजराइल ने शुरू किया था| 


भारत सरकार ने तुरंत खामनेई की मौत का जिक्र तक नहीं किया | बाकी मुल्को ने खामनेई की मौत पर सांत्वना सन्देश भेजा था| 

परन्तु भारत ने अमरीका और इजराइल के दबाव मै एक सन्देश तक नहीं भेजा | 

जब सोनिया गाँधी का अखबार मै एक लेख लिखा और इस तरफ सरकार का ध्यान खींचा , इसके साथ ही विपक्ष ने अतिरिक्त दबाव बनाया, इसके बाद भारत सरकार जागी और अपने एक अधिकारी को ईरान दूतावास भेजा और शोक सन्देश लिखा | इस शोक सन्देश मै भी खामनेई का नाम नहीं लिखा | 


भारत की दूसरी गलती ,ये रही की प्रथम दृष्टया जो युद्ध शुरू करता है, दोषी भी वही रहता है| परन्तु भारत ने ये सच लिखने की भी हिम्मत नहीं जुटाई | भारत को इस युद्ध की शुरुआत करने के लिए इजराइल और अमरीका को दोष देते हुए एक सन्देश भेजना चाहिए था | 

ये हिम्मत भी न दिखाने का कारण भी ,अमरीका और इजराइल का दबाव ही था | 

तो यहाँ तक भारत ने २ गलती कर दी थी ,

  • पहली की खामनेई और परिवार की मौत पर शोक सन्देश न भेजना | 
  • दूसरा की अमरीका/इजराइल का युद्ध शुरू करने का विरोध तक न करना | 
अब भारत सरकार की अन्य गलती बतलाता हूँ ,
जब अमरीका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया , उससे ३६ घंटे पहले मोदी जी इजराइल मै कोई पहली दफा बना हुआ पुरस्कार प्राप्त कर रहे थे | 
इसी दौरान इजराइल की संसद मै मोदी जी ने इजराइल को fatherland बोल दिया | 
किसी से खुश हो जाओ और ऐसा बिछ जाओ, ये बहुत बड़ी कूटनीतिक गलती साबित हुई | 
पूर्व मै सबको याद होगा की ट्रम्प के पहले कार्यकाल मै मोदीजी के द्वारा ट्रम्प का चुनाव प्रचार कर रहे थे और वो चुनाव बिडेन जीत गए | 
फिर पांच साल ,अमरीका ने कई दफा भारत को बेइजत किया 
तो तीसरी गलती रही की मोदी का ३६ घंटे पहले इजराइल जाके,उसको मूक समर्थन देना और ईरान से अपनी दूरी और बड़ा ली | 

भारत की चौथी गलती ये रही की,
जयशंकर और अन्य अधिकारी द्वारा विदेश नीति बनवाना | मुझे ऐसा लगता है की जयशंकर जैसे रोबोट की जगह कोई राजनीतिक आदमी होता तो चीज़ बिलकुल अलग होती | 
इस युद्ध मै भारत को अपना पक्ष दोनों तरफ रखना चाहिए था | भारत को अपना पक्ष ईरान-इजराइल और अमरीका सबकी तरफ रखना चाइये था | 
परन्तु विदेश नीति बनाने वालों को लगा अमरीका/इजराइल ,दो - तीन दिन मै युद्ध खत्म कर देंगे | परन्तु ऐसा नहीं हुआ | 
युद्ध ४० दिन से ज्यादा चल रहा है , हमारे पूर्व मै  ईरान के साथ सम्बन्ध मधुर रहे है | ईरान कई दशकों से ईरान से कच्चा तेल ले रही है और २०१९ तक तेल लेता रहा है | 
पर भारत की सरकार की दक्षिणपंथी नीति , की ईरान एक मुस्लिम राष्ट्र है,इससे हमको दूर रहना चाहिए | 
बाकी गलतियां भारत की रही ,
चौथी गलती रही की पूर्व राजनायिक को विदेश मंत्री बनवा देना | 
पांचवी गलती रही की घरेलु मुस्लिम विरोधी छवि को सुधारने या और पक्का करने के लिए, विदेश नीति बनाना | 
छथि गलती रही की भारत का अत्यधिक अमरीका से भयभीत हो जाना 




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