Thursday, March 12, 2020

गीता 14:5

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाः।
निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्।।14.5।।

 हे अर्जुन सत्व,रज और तम,ये तीनों गुण आत्मा को देह से बाँध देते हैं|

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