महात्मा राम चंद्र महाराज जी की शिक्षा
आप कभी भी अपनी शक्ल का ध्यान करने को नहीं कहा | कहा की जो तुम्हे सबसे ज्यादा अच्छा लगे , उसका ध्यान करो |
आप कई भक्तो को कर्म-काण्ड करने के लिए भी कह दिया करते थे | किसी भक्त को जप करने का भी आदेश दे दिया करते थे |
महात्मा जी की शिक्षा एक मिली जुली शिक्षा थी |
जिसमे कर्म-काण्ड, कर्मयोग ,भक्तियोग ,ज्ञानयोग और प्रेमयोग सब कुछ शामिल था |
आपकी शिक्षा हर एक भक्त के अनुसार थी | इसमें कोई एक विधि नहीं थी | जिस पात्र का भक्त था,उसके लिए वैसे ही शिक्षा |
आपके के अनुसार फकीरी की तीन निशानी होती है इल्लत,क़िल्लत और ज़िल्लत।
इल्लत का अर्थ है की शारीरिक कोई व्याधि होनी चाहिए |
क़िल्लत का अर्थ है की रुपए की तंगी रहना
और ज़िल्लत का अर्थ है की लोग उसकी निंदा भी लगातार करते रहे
इन तीन चीज़ होने से अहंकार नहीं रहता और घमंड थोड़ा दूर रहता है |
आप कहते थे की जिसने अपना मन मार लिए, वो इस दुनिया का बादशाह है |
साथ ही मन मारना दुनिया का सबसे कठिन कार्य है |
सदाचार से रहने के आप बहुत बड़े पक्षधर थे |
प्रार्थना मै आपका बहुत विश्वास था परन्तु वो प्रार्थना अपने सुख सुविधा के लिए नहीं होनी चाहिए | प्रार्थना हमेसा दूसरे के लिए होनी चाहिए |

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