Friday, September 30, 2022

ध्यान की क्रिया

ये मेरा अनुभव है,और मेरा अल्प -ज्ञान भी हैं ,
इस संसार मै भगवान् की प्राप्ति का केवल एक रास्ता है और वो है ध्यान | 
तमाम तरह का कर्म काण्ड वैगेरह अंकित है , परन्तु मेरे हिसाब से वो सब आपको ध्यान रूपी क्रिया तक ही ले जाता है| 

जैसे ये मेरा मानना है,जो की पूरी उम्मीद है की गलत भी हो सकता है की आप मान लीजिये जाप करते है | ये एक क्रिया है जिसका बहुत महत्व है,परन्तु जब आप इस क्रिया को पुरे मनोयोग से करते है तो कुछ दिन,महीना ,वर्ष या वर्षो बाद आप अपने आराध्य का ध्यान करने लगते हो| आप उसी के स्मरण मै ही रहने लगते हो | आप उठते ,बैठते,खाते ,पीते, केवल उसी भगवान् के चित्र अपने मन मै संजोये रहते हो | और हम इसी को ध्यान कहते है | 

खैर मैं यहाँ जिस ध्यान के बारे मै लिख रहा हूँ वो एक क्रिया है जो आप दिनभर नहीं, परन्तु कुछ मिनट या घंटो के लिए करते हो | ये क्रिया दुनिया मै बहुत तेज़ी से मशहूर हो रही है और लोगो को इससे लाभ भी मिल रहा है | 

यह ध्यान की क्रिया महात्मा राम चंद्र जी महाराज ने अपने गुरु हुज़ूर साहब से लेके हम  सबको दी | 


ध्यान की क्रिया मन द्वारा होती हैं | हमे अपने मन को संयम मै लाना होता है,उसमे उठ रहे विचारों को अपने द्वारा नियंत्रण करना होता है | या यु कहाँ जाए की जो विचार हमारे मन मै आ रहे है,उनको नहीं आने देना होता है | मन का ही खेल है इस क्रिया मै | आप इस  क्रिया मै सफल होते हो या असफल,सब मन पर ही निर्भर होता है | 

इस क्रिया मै हमको एक स्थिर आसान पे बैठना होता है | जिससे हम आराम से ध्यान के दौरान बैठे रह सकते | इसमें आप पलथी से बैठ सकते है, या आप कुर्सी पर भी बैठ कर रह सकते है | 
आँखें बंद कर लीजिये | 
हमने अगर गुरु लिया है ,तो ठीक नहीं तो,जिससे भी आराध्य समझते है ,उसको अपने सामने बैठा हुआ महसूस करना होता है | 
उसके बाद हमको ये मन की आँखों से देखना होता है की जो आराध्य हमारे सामने बैठे है,उनमे से प्रकाश निकल रहा है और सारा प्रकाश हमारे शरीर मै जा रहा है, और हमारे शरीर का रोम रोम उस प्रकाश से प्रकाशित हो रहा है | 

जब हम थोड़ी देर ऐसा कर ले जाते है और उस समय मन मै बाकी विचार नहीं आ रहे होते है ,
तब मन अपने स्थाई भाव मैं चला जाता है| हमारा मन शांत और निर्मलता की और चला जाता है | इस अवस्था को हम समाधी लेना कहते है और आप एक बार इस स्थिति पे पहुंच गए फिर आप जितनी देर ध्यान करना चाहे , कर सकते है | 

यह सुने मै काफी सरल है,परन्तु इसको कितने लोग कर रहे है, आप अपने आस पास देख ही सकते है | 
मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है की इस क्रिया से हम ईश्वर से साक्षात्कार कर सकते है | 

शब्द मार्ग

ये उन साधकों के लिए है जो नए नए ध्यान मार्ग मै आना चाहते है | 
उनको क्या करना चाहिए की पालथी की अवस्था मै बैठ जाए और अपनी आँख बंद कर लें | 
अपने दिल की दड़कन को महसूस करें | उस धड़कन की आवाज़ को सुने | उससे निकल रहा ॐ ,राम या अल्लाह की आवाज़ को सुनने के लिए खुद को प्रेरित करें | 
इस क्रिया को शब्द मार्ग का नाम दिया गया है | 
इस क्रिया करने से भी मन काफी शांत होता है | 

विशवास

देखिये इस ध्यान रूपी अभ्यास को सरल बनाने के कई तरीके है को भी आसान भी है और बहुतो के लिए ये बहुत कठिन है |
 आप के द्वारा ये अभ्यास बहुत सरल हो जाएगा अगर आप विश्ववास रखिये की इस क्रिया द्वारा आप ब्रह्मज्ञान को प्राप्त कर लेंगे | आप को अगर विश्वास है की इस क्रिया के बाद आप ईस्वर को प्राप्त कर लेंगे, तो ये क्रिया बहुत आसान है | 

दूसरा विश्वास करना है  जब आप ध्यान लगा रहे है तो ईश्वर आपके सामने बैठा है | आपके आराध्य द्वारा निकल रहा प्रकाश आपको सराबोर कर रहा है | इस चीज़ पर अगर आपको विश्वास है तो सच मानिये इस क्रिया मै आप बहुत जल्द पारंगत हो जाएंगे और इस ध्यान रूपी अभ्यास की यात्रा मैं आने वाली कठनाईयाँ भी स्वतः हल होते चली जाएंगी | 

आप जैसे जैसे ध्यान करते रहेंगे, आप इसमें और लिप्त होते जाएंगे | कई साधकों मै देखा गया है की वो ध्यान करते करते समाधी मै चले जाते है अर्थात आपके मन मै विचार आना ही बंद हो जाता और ऐसा भी देखा गया है की कुछ साधक इसका इतना अभ्यास कर लेते की उनको कोई अतिरिक्त बल नहीं लगाना पड़ता मन के विचारो से पार पाने के लिए | मतलब ध्यान के दौरान विचार आया और वो स्वतः ही चला गया | सोचिये ऐसे साधको की स्थिति | 

ध्यान का समय

परम पूज्य राम चंद्र जी महाराज ने कहा है ध्यान के लिए सुबह 4 से 6 बजे और शंध्या का 6 से 8 का समय उपयुक्त है | यानी दिन-रात मिलन से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक का समय उपयुक्त है | 

वैसे आपको जो समय ठीक लगे आप शुरुआत मै उसको अपना सकते है | 
कई संतो ने कहा है की संध्या का समय ध्यान योग मै सबसे उपयुक्त है | 
कई संतो का मत है रात्रि के तीसरे पहर यानी रात एक बजे के बाद का समय सबसे उपयुक्त है | 

परन्तु नए साधक अपने हिसाब से समय का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र है | 

हमारे सत्संग के एक पहुंचे हुए संत ने फ़रमाया है की रात्रि विश्राम करने के लिए नहीं होती है |
ये समय ईश्वर की याद करने के लिए होता है | उस समय गुरुदेव शिष्यों मैं ध्यान शक्ति पहुंचते है | 
उनका कहना था की जो भी  अपने आराधय का ध्यान किये बिना हो सो जाता है , उसके पास से आराध्य की ध्यान धारा आकर लौट जाती है | वो साधक रात्रि कृपा से विमुख हो जाता है | 

जो साधक अपने आराध्य का ध्यान करते करते सोता है , उसको आराध्य ऊंची स्थिति मै ले जाते है | 
ध्यान मै सोने की पहचान है की शरीर हल्का लगता है | 


नए साधक ध्यान शुरू करें और धीरे धीरे इसका समय बढ़ाते जाए | 
आप अपनी व्यस्तता के हिसाब से ध्यान का समय निर्धारित कर सकते है | 

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